जिस घर में कुछ दिन बाद शहनाइयां गूंजनीं थीं, वहां अब मातम है। 31 वर्षीय युवराज सिंह मनचंदा 6 सितंबर की शाम परिवार से कहकर निकले थे कि गुरुग्राम में एक बैठक के बाद घर लौट आएंगे। लेकिन वह फिर कभी वापस नहीं लौटे। परिवार उनकी वापसी का इंतजार करता रहा।
उनकी बहन ने बताया कि परिवार उस दिन लाजपत नगर में शादी की खरीदारी कर रहा था। युवराज की शेरवानी भी तय हो चुकी थी। खरीदारी के बाद युवराज ने एक पूर्व महिला सहकर्मी से मीटिंग की बात कही थी। उन्होंने अपनी मंगेतर और अपने अधिकारी को भी इस बैठक के बारे में बताया था।
युवराज की शादी की तैयारियां पूरे जोर-शोर से चल रही थीं। परिवार के लिए यह खुशी का पल था। शेरवानी तय होने के बाद सभी काफी खुश थे। लेकिन कुछ ही समय बाद यह खुशी मातम में बदल गई। युवराज की लाश गुरुग्राम के एक नाले में मिलने से परिवार सदमे में है।
सेहरा पहनता युवराज, उससे पहले ही मार दिया
युवराज मनचंदा की अगले महीने शादी तय थी। छह सितंबर को वह बहनों के साथ अपनी शादी की शॉपिंग के लिए लाजपत नगर मार्केट गए थे। शेरवानी व अन्य सामान की खरीदारी के बाद सभी लाजपत नगर के ही एक रेस्तरां में गए। तभी एक फोन आने पर युवराज बहन से मीटिंग के लिए गुरुग्राम जाने की बात कहकर निकल गए थे।
गुरुग्राम पुलिस पर गंभीर आरोप
उनकी बहन ने गुरुग्राम पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। न तो पोस्टमार्टम रिपोर्ट दी गई और न ही उसका कोई सामान सौंपा गया। उनका कहना है युवराज ने हाथ में सोने व पुखराज की अंगूठी और एक कड़ा पहना हुआ था। पर गुरुग्राम पुलिस ने हमें कोई निशानी नहीं दी। उल्टा उन्हें बताया गया कि युवराज की मौत खेत में भरे पानी में डूबने से हुई है
दो बहनों के इकलौते भाई थे
युवराज मनचंदा के पिता लकवाग्रस्त हैं जबकि मां दिल की मरीज हैं। उनकी दो बहनें हैं। बड़ी बहन की शादी हो चुकी है। परिवार में युवराज ही अकेले कमाने वाले थे। बहन करिश्मा ने कहा कि परिवार के लिए यह बहुत बड़ा झटका है
युवराज सिंह मनचंदा हत्याकांड के आरोपी गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
यह था पूरा मामला
दक्षिण दिल्ली के लाजपत नगर निवासी मैनेजर युवराज सिंह मनचंदा की हत्या कर शव को गुरुग्राम में फेंकने, गुरुग्राम पुलिस के द्वारा शव को अज्ञात समझकर अंतिम संस्कार करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। खास बात है कि इससे दिल्ली पुलिस व गुरुग्राम पुलिस के बीच कोर्डिशन व पुलिस तंत्र के जिपनेट पर बड़े सवाल खड़े होते हैं।
दिल्ली पुलिस ने हत्या करने के आरोप में 31 वर्षीय युवराज सिंह मनचंदा की दोस्त रही और पहले साथ काम चुकी युवती आन्या वत्स और उसके दोस्त संयम सचदेवा को उत्तराखंड से गिरफ्तार कर लिया है। शुरुआती जांच में युवराज की हत्या का कारण पैसे का लेने-देन बताया जा रहा है। हालांकि युवती बार-बार अपने बयान बदल रही है। पुलिस ने दोनों को बृहस्पतिवार को अदालत में पेश कर 5 दिन के पुलिस रिमांड पर लिया है।
युवराज सिंह मनचंदा की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
दक्षिण-पूर्व जिला पुलिस उपायुक्त विनीत कुमार ने बताया कि युवराज के गायब होने की शिकायत सरिता विहार, दिल्ली में रहने वाली उसकी बहन हरसिमरन मनचंदा 11 सितंबर को लाजपत नगर थाने में दर्ज कराई थी। पीड़ित बहन ने कहा था कि छह सितंबर को अपने भाई के साथ सेंट्रल मार्केट, लाजपत नगर व गोल्डन ड्रैगन रेस्टोरेंट, के-ब्लॉक, लाजपत नगर-दो गई थी।
शाम लगभग 4:00 बजे, युवराज यह कहकर रेस्टोरेंट से चले गए कि उनकी गुरुग्राम में पूर्व ऑफिस सहयोगी अन्या वत्स के साथ एक मीटिंग है। रात 10 बजे तक तक युवराज नहीं लौटे। उनका मोबाइल फोन स्विच ऑफ मिला। लाजपत नगर थाना पुलिस को जांच में पता लगा कि युवराज ने आखिरी बार अपनी पूर्व ऑफिस सहयोगी अन्या वत्स से बात की थी।
युवराज सिंह मनचंदा की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
जांच में अन्या वत्स के एक नए मोबाइल नंबर का पता चला। जांच के बाद से उसके साथी संयम सचदेवा के साथ गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी युवती ने बताया कि उसने युवराज की हत्या अपनी क्रेटा कार में दो गोली गर्दन में मारकर की है। हालांकि इसका पुलिस गुरुग्राम से पता लगा रहा है।
आरोपियों ने बताया कि युवराज के शव को गुरुग्राम में फेंक दिया था। इसके बाद पुलिस को पता लगा कि 10 सितंबर को गुरुग्राम के बादशाहपुर पुलिस स्टेशन ने अपने इलाके में एक नाले से एक अज्ञात लाश बरामद की थी। मृतक की तस्वीरों से बहन ने युवराज के रूप में पहचान की थी। तस्वीरों में दिख रहे कपड़ों और शारीरिक हुलिए से भी इस पहचान की पुष्टि हुई।
गुरुग्राम में 11 सितंबर को सीवर से बरामद हुआ था शव
युवराज का शव बादशाहपुर थाना इलाके में 11 सितंबर को सीवर में सड़ी गली हालत में मिला था। शव को तीन दिन तक पहचान के लिए रखवाया गया। कानूनी प्रक्रिया पूरी कर पहचान न होने पर 14 सितंबर को पोस्टमार्टम के बाद शव का पुलिस ने अंतिम संस्कार करा दिया था।
कारण बताया
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आन्या ने बताया कि उसे गुप्ता नाम का व्यक्ति ब्लैकमेल करता था। उसने युवराज की हत्या करने को बोला था। वह गुप्ता से वर्ष 2022 में मिली थी। कभी पैसे को लेकर हत्या करने की बात कहती है।
लिव इन में रह रहे थे दोनों
दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आन्या व संयम काफी समय से सहमति संबंधों में रह रहे थे। इनका एक बच्चा भी है। संयम के खिलाफ शाहदरा में घरेलू हिंसा का मामला दर्ज है। आन्या के खिलाफ संसद मार्ग थाने में सवा करोड़ की ठगी की शिकायत है।