कहा जा रहा है कि वित्तमंत्री अरुण जेटली का बजट युवाओं पर फोकस है। मगर उनके इस बजट से साइबर सिटी का युवा वर्ग ही काफी मायूस है।
उनका कहना है कि जेटली ने बड़ी सफाई से उनकी जेब में कैंची चला दी है। युवा वर्ग को सबसे अधिक पेरशानी सर्विस टैक्स के बढने से है। उनका कहना है कि मोदी सरकार ने विकास और राहत देने के स्थान पर टैक्स वसूली का ही काम कर रही है।
इस बार सर्विस टैक्स को 14.5 फीसदी से बढ़ाकर अब 15 प्रतिशत कर दिया गया है। इससे युवाओं का मूवी देखना, रेस्टोरेंट में खाना और मोबाइल बिल महंगा होने जा रहा है।
गुडग़ांव के युवा वर्ग को अरुण जेटली के बजट से काफी उम्मीदें थी। यही कारण है कि सुबह से यह वर्ग टीवी पर उनके बजट भाषण को बेसब्री से सुन रहा था।
इन्हें पहला झटका तब लगा जब 0.5 फीसदी कृषि कल्याण कर की घोषणा से हुई। सर्विस टैक्स के बढने से रेस्टोरेंट में खाना, मल्टीप्लेक्स में सिनेमा देखना, मोबाइल के इस्तेमाल पर अधिक बिल देने के साथ-साथ रेडीमेट परिधानों पर भी खर्च बढने वाला है।
युवा राजकुमार सैनी का कहना है कि यह बजट युवाओं को निराश करने वाला है। अब तो सरकार लोगों के बाहर खाने और मनोरंजन करने पर भी पाबंदी लगा रही है। गुडग़ांव की गिनती देश के बड़े इंटरटेनमेंट हब के तौर पर होती है। अब यहीं के लोगों को ही इससे महरूम किया जा रहा है।
छात्रा मनीषा बल्हारा का कहना है कि जेटली के बजट ने युवाओं को काफी निराश किया है। शुरूआत में जब उन्होंने 1500 मल्टी ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट्स खोले जाएंगे। एसएसी-एसटी वर्ग के युवाओं पर ही ज्यादा फोकस किया गया है। इसके तहत स्टैंडअप इंडिया स्कीम के दायरे में इस कटेगरी के युवाओं को जॉब प्रोवाइडर बनाने का मौका देने की बात कही गई है।