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संभालकर रखें अपनी प्लास्टिक मनी नहीं तो...

Thu, 17 Jul 2014 02:20 PM IST
संदीप वर्मा/अमर उजाला, नोएडा
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यदि आप किसी भी एटीएम मशीन से रुपये लेने जा रहे हों तो विशेष सावधानी रखें। हो सकता है आपकी एक चूक का फायदा उठाने के लिए वहां कोई धोखेबाज या हैकर मौजूद हो। आपके गाढ़े पसीने की कमाई कुछ ही मिनटों में फुर्र हो जाए।
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शहर में साइबर क्राइम के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही हैं। विशेषकर एटीएम, डेबिट या क्रेडिट कार्ड से रुपये निकलने की माह में दस से अधिक वारदातें हो रही हैं। कहीं मशीन हैंग कर या क्लोनिंग कर हैकर्स इन वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।

घर पर बैठे ही शातिर हैकर इंटरनेट के माध्यम से अकाउंट हैकिंग, कार्ड क्लोनिंग और नेट बैंकिंग के जरिए अकाउंट से लाखों रुपये उड़ा रहे है। वहीं, एटीएम मशीनों पर भी रुपये उड़ाने वाले गिरोह सक्रिय हैं।
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पिछले छह महीनों में ऐसे गिरोह करीब 60 से 70 लोगों को एटीएम कार्ड क्लोनिंग, एटीएम हैंग और एटीएम मेल हैंकिंग कर अकाउंट से लाखों रुपये निकाल कर चूना लगा चुका है।

बावजूद इसके साइबर सेल में तैनात अधिकारी अब तक एक भी गिरोह का पता नहीं लगा पाए हैं। जिले की साइबर टीम प्रभारी और सीओ टू नोएडा विश्वजीत श्रीवास्तव ने बताया कि मशीन हैंग करने वाली सभी वारदातें उन एटीएम मशीनों में होती हैं जिनमें कार्ड स्वैप किया जाता है।

एक्सपर्ट की कमी से जूझ रहा साइबर सेल
2013 में नोएडा साइबर सेल पुलिस के साथ काम कर चुके साइबर विशेषज्ञ किस्लेय चौधरी के अनुसार सेल में तैनात पुलिसकर्मियों में साइबर की जानकारी का बहुत अभाव है। सेल में तैनात जवान सर्विलांस को ही साइबर क्राइम से निपटने का तरीका समझते है। लेकिन यह साइबर का बहुत छोटा सा हिस्सा है। सेल में तैनात सभी पुलिसकर्मियोें को नियमित साइबर का प्रशिक्षण देने की काफी जरूरत है। इसके साथ ही जल्दी-जल्दी होने वाले तबादलों पर भी अंकुश लगाने की जरूरत है।

अलग अलग तरीकों से लगाते हैं चूना
अधिकतर मामले में एटीएम को हैंग करके रुपये उड़ाने वाले आ रहे हैं। उन्हीं एटीएम मशीनों में वारदातें हो रही हैं जिनमें कार्ड स्वाइप करने की सुविधा होती है। गिरोह के सदस्य नंबरों को छोड़कर बाकी बटनों में चिपकाने वाला पदार्थ लगा देते हैं। कार्ड मशीन में पिन कोड डालकर जैसे ही आप मशीन में ऐंटर का बटन दबाते हैं। इस दौरान एक बटन पहले से दबा होता है जिससे मशीन हैंग हो जाती है। मशीन हैंग होने पर व्यक्ति के बाहर निकलते ही जालसाज उस बटन से चिपकाने वाला पदार्थ हटा देते हैं और मशीन शुरू हो जाती है। अब जालसाज रकम भरकर रुपये उड़ा ले जाते हैं। कई बार जालसाज व्यक्ति को आकर एटीएम खराब होने की सूचना देकर टरका देते हैं।
बचाव- एटीएम में ट्रांजेक्शन करने से पहले उसके बटनों की ध्यान से देख लें। खास कर निरस्त कैंसल बटन पर ध्यान दें। संदेह होने पर कार्ड स्वाइप कर पिन डालकर एंटर बटन दबाने की बजाए, कैंसल बटन दबाकर जांच कर सकते हैं।

किसी से न निकलवाए पैसे
एटीएम से धोखाधड़ी गिरोह के जालसाज हमेशा इसके आसपास सक्रिय होते हैं। जालसाज अक्सर कम पढ़े लिखे या बुजुर्ग लोगों को अपना निशाना बनाते है। यह लोगों की मदद के नाम पर एटीएम कार्ड हाथ में ले लेते हैं। पिन कोड पता कर आरोपी मशीन खराब होने की जानकारी देकर कार्ड बदल देते हैं। व्यक्ति के बाहर निकलते ही आरोपी उन्हीं के एटीएम के अकाउंट से रुपए निकाल लेते हैं।
बचाव- किसी भी एटीएम बूथ में पैसे निकालने के लिए जाने पर अलर्ट रहे। किसी के भी मदद करने के लिए हाथ बढ़ाने पर उसे अपना एटीएम कार्ड न दें। साथ ही एटीएम बूथ में खडे़ किसी भी अज्ञात शख्स के आगे अपना पिन कोड न डालें।

पर्स में पड़ा डेबिट कार्ड और रुपये गायब
अक्सर खरीददारी के दौरान दुकानों या मॉल पर इस गिरोह के सदस्य भी कार्य करते हैं। डेबिट या क्रेडिट कार्ड की क्लोनिंग कर लेते हैं। इन मामलों में आपके पास कार्ड पड़ा होता है और रुपये आपके एटीएम से निकल जाते हैं।
बचाव- खरीददारी करते या पेट्रोल भराते समय स्वयं ही पिनकोड डालें। किसी सेल्समैन को अपना पिनकोड न बताएं। वहीं, कार्ड स्वाइप करते समय ध्यान दें कि सेल्समैन एक मशीन के अलावा कोई अन्य मशीन से कार्ड स्वाइप तो नहीं कर रहा है।

मेल हैकर नेटबैंकिंग के जरिए होती है ठगी
हैकर अक्सर आपका ईमेल हैक कर आपके बारे में सारी जानकारी हासिल कर लेते हैं। इसके बाद नेटबैंकिंग के जरिए नए पासवर्ड बना लेते हैं। इसके बाद आपके मेल से ही नेटबैंकिंग की जानकारी लेकर रुपये अपने फर्जी खातों में भेजकर निकाल लेते हैं। अक्सर ऐसे मामले शनिवार को अंजाम दी जाती हैं। जिससे रविवार को बैंक बंद होने पर आपको ठगी की देरी से जानकारी मिले।
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