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Delhi NCR News: संकट में युवाओं का मानसिक स्वास्थ्य, 35 साल से कम उम्र के 60% प्रभावित

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-नई यशोभूमि में इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी की ओर से आयोजित चार दिवसीय सम्मेलन में दी जानकारी
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-विशेषज्ञों ने कहा, मानसिक बीमारियां अब केवल बुजुर्गों की समस्या नहीं, किशोरों और युवाओं को तेजी से प्रभावित कर रहीं

-आंकड़ों के अनुसार, मानसिक रोगों की शुरुआत अक्सर 19-20 वर्ष की उम्र में ही हो रही


अमर उजाला ब्यूरो

नई दिल्ली। देश में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ रही है। इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी द्वारा आयोजित चार दिवसीय सम्मेलन (एएनसीआईपीएस 2026) में यह जानकारी सामने आई कि लगभग 60 प्रतिशत मानसिक विकार 35 वर्ष से कम उम्र के लोगों में पाए जा रहे हैं। सम्मेलन में उपस्थित विशेषज्ञों ने चेतावनी दी कि मानसिक बीमारियां अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है, बल्कि किशोर और युवा तेजी से इसके शिकार हो रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, मानसिक रोगों की शुरुआत अक्सर 19-20 वर्ष की उम्र में ही हो जाती है।



विशेषज्ञों ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय और भारतीय अध्ययनों के अनुसार, लगभग 35 प्रतिशत मानसिक विकार 14 वर्ष की उम्र से पहले होते हैं। इसके अलावा, 48 प्रतिशत 18 वर्ष से पहले और 60 प्रतिशत से अधिक 25 वर्ष की उम्र तक शुरू हो जाते हैं। इसका सीधा असर बच्चों और युवाओं की पढ़ाई, करियर, रिश्तों और जीवन की गुणवत्ता पर पड़ता है। सम्मेलन में यह भी बताया गया कि एडीएचडी, एंग्जायटी और खाने से जुड़ी मानसिक बीमारियां अधिकतर 25 वर्ष की उम्र तक सामने आ जाती हैं, जबकि डिप्रेशन, नशे की लत और व्यवहार संबंधी समस्याएं अब पहले की तुलना में कम उम्र में ही देखी जा रही हैं।
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60 प्रतिशत मानसिक रोग युवा वर्ग को कर रहे प्रभावित


इस दौरान एएनसीआईपीएस के आयोजन सचिव डॉ. दीपक रहेजा ने कहा कि जब देश के 60 प्रतिशत मानसिक रोग युवा वर्ग को प्रभावित कर रहे हैं, तो यह एक गंभीर राष्ट्रीय चिंता का विषय है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, आत्महत्या अब 15 से 29 वर्ष के युवाओं में मृत्यु का तीसरा सबसे बड़ा कारण बन चुकी है। विशेषज्ञों ने इसका कारण पढ़ाई का दबाव, सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग, अकेलापन, नशा और भावनात्मक तनाव बताया।
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मानसिक बीमारियों का समय पर इलाज जरूरी

डॉ. निमेश देसाई ने कहा कि यदि मानसिक बीमारियों का समय पर इलाज न हो, तो ये जीवन भर बनी रह सकती हैं। ऐसे में इसका असर व्यक्ति, परिवार व समाज सभी पर पड़ता है। वहीं, इंडियन साइकियाट्रिक सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ. सविता मल्होत्रा ने कहा कि युवाओं की बदलती जीवनशैली को ध्यान में रखते हुए मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को आसान, सुलभ और बिना भेदभाव के बनाना होगा। डॉ. टीएसएस राव ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य पर निवेश कोई खर्च नहीं, बल्कि देश के भविष्य में निवेश है।
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