- दिल्ली हाईकोर्ट ने आनंद विहार इंटर-स्टेट बस टर्मिनल के बाहर सभी अनधिकृत ठेला विक्रेताओं को हटाने के दिए आदेश
- न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति मधु जैन की खंडपीठ ने कहा, यात्रियों की सुविधाओं के लिए उचित स्थान आवंटित किए जाएं
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने आनंद विहार अंतरराज्यीय बस टर्मिनल (आईएसबीटी) के आसपास सड़कों पर अनाधिकृत तरीके से दुकानें और ठेला चलाने वाले विक्रेताओं के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) को निर्देश दिया कि क्षेत्र से सभी अनाधिकृत हॉकरों और विक्रेताओं को हटाएं। केवल टाउन वेंडिंग कमेटी (टीवीसी) के सर्वे में योग्य मिले 105 विक्रेताओं को ही सख्त शर्तों के साथ मोबाइल ठेलों से व्यवसाय करने की अनुमति दी जाएगी।
न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति मधु जैन की खंडपीठ ने महिला हॉकर वेलफेयर एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। एसोसिएशन ने अपने सदस्यों को आनंद विहार बस स्टैंड के पास सामान बेचने की सुरक्षा की मांग की थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि 2016 में कुछ विक्रेताओं को दी गई अंतरिम सुरक्षा अब समाप्त मानी जाएगी, क्योंकि अब टीवीसी का सर्वे पूरा हो चुका है।
अतिक्रमण से यात्रियों को होती है परेशानी
अदालत ने कहा कि आईएसबीटी क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अनधिकृत हॉकिंग से भीड़भाड़ और यातायात में बाधा हो रही है। सार्वजनिक स्थलों पर अतिक्रमण पूरी तरह अस्वीकार्य है। पीठ ने एमसीडी को निर्देश दिया कि पुलिस के संबंधित एसएचओ या डीसीपी के साथ मिलकर सभी अनधिकृत विक्रेताओं को हटाने की कार्रवाई करें। विक्रेताओं को अपना सामान हटाने के लिए उचित समय दिया जाए। एमसीडी को 30 जनवरी 2026 तक इन निर्देशों की जानकारी विक्रेताओं तक पहुंचाने के लिए कदम उठाने होंगे। 31 जनवरी से शुरू होने वाले सप्ताहांत से हटाने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। कोर्ट ने चेतावनी दी कि अतिक्रमण हटाने के दौरान कोई भी व्यक्ति बाधा नहीं डालेगा। अदालत ने कहा कि टीवीसी सर्वे में योग्य पाए गए अन्य विक्रेताओं को भी केवल अस्थायी सर्टिफिकेट ऑफ वेंडिंग (सीओवी) जारी होने पर ही व्यवसाय की अनुमति मिलेगी।
एमसीडी की कार्रवाई के बाद पीडब्ल्यूडी कराए सौंदर्यीकरण
पीठ ने एमसीडी और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को निर्देश दिया कि अतिक्रमण हटाने के बाद क्षेत्र का सुंदरीकरण हो। यात्रियों के लिए भोजनालय, स्वच्छता सुविधाएं, आराम करने की जगहें और कुछ नियंत्रित दुकानें बनाई जाएं, ताकि आने-जाने में कोई रुकावट न हो। इलाके को ठीक से प्लान कर जनता के लिए खुली जगह सुनिश्चित की जाए। एमसीडी को 10 मार्च 2026 तक इस योजना की प्रति अदालत में पेश करने का आदेश दिया है।