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इसकी एक परेशानी ने बचा ली लाखों की जान

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मंगलवार से पहले तक देश में चल रही बहस ने अचानक एक नया मोड़ ले लिया। असल में इस नई बहस में योगदान देने में 26 वर्षीय एक युवा का महत्वपूर्ण योगदान है।
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वर्धमान कौशिक पिछले कुछ दिनों से जब भी मॉर्निंग वॉक पर जाते तो कुछ जल्दी ही थकान महसूस करने लगते। उन्हें लगा जैसे दिन पर दिन उनकी क्षमता कम होती जा रही है।

जल्दी ही उन्हें महसूस हुआ कि शहर की हवा उन्हें तेजी से प्रभावित कर रही है और उनके फेफड़ों पर विपरीत प्रभाव डाल रही है। अपनी इस परेशानी के साथ फरवरी 2014 को वह नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल पहुंचे।
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उन्हें नहीं पता था कि उनकी इस छोटी सी शिकायत का इतना बढ़ा असर होगा और दिल्ली में 15 साल से पुराने सभी वाहनों को चलने से ही रोक दिया जाएगा। इस आदेश के बाद देश भर के मीडिया में प्रदूषण का मुद्दा चर्चा के केंद्र में आ गया।

वर्धन कौशिक की उम्र महज 26 साल है और उनका कहना है कि उन्हें शर्म महसूस होती है जब अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भारत का इस बात के लिए मजाक उड़ाया जाता है कि वायु प्रदूषण के मामले में भारत ने चीन को भी पीछे छोड़ दिया है।

वर्धन को करना होगा अपनी मर्सिडीज बेंज का बलिदान

बता दें कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने दिल्ली में पेट्रोल से चलने वाले उन सभी वाहनों पर प्रतिबंध लगा दिया है जो 15 साल से ज्यादा पुराने हैं। साथ ही डीजल से चलने वाले उन सभी वाहनों पर प्रतिबंध का आदेश दिया है जो दस साल पुराने हैं।

कौशिक ने पुणे से लॉ की पढ़ाई की है और अपने परिवार के साथ गुड़गांव में रहते हैं। उनका कहना कि अब गेंद सरकार के पाले में हैं लेकिन इसके लिए हम सबको कुछ न कुछ बलिदान करना होगा। कौशिक कहते हैं कि बलिदान करने वालों में वह भी शामिल हैं।

असल में उनके परिवार के पास तीन कारें हैं जिसमें से एक 2005 मॉडल की मर्सीडीज बेंज भी है। उनका कहना है कि मेरे पिता इस कार को चलाते हैं लेकिन हम इसे खोने के लिए तैयार हैं।

क्यों दायर की याचिका

इसी मंगलवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने आदेश दिया है कि डीजल से चलने वाले सभी प्राइवेट और कमर्शियल वाहनों का दिल्ली में चलाना प्रतिबंधित होगा।

कौशिक द्वारा दायर याचिका के आधार पर दिल्ली की हवा को प्रदूषण मुक्त करने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने नबंबर 2014 को आदेश देते हुए दिल्ली में चल रहे 15 साल से पुराने सभी वाहनों को प्रतिबंधित कर दिया था।

कौशिक का कहना है कि मेरी याचिका का मकसद दिल्ली में बढ़ रहे प्रदूषण की ओर लोगों का ध्यान खींचना और उसके रोक के लिए कदम उठाने का प्रयास करना था।
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सरकार की को‌ताही से बढ़ी परेशानी

कौशिक बताते हैं कि उन्होंने अपनी याचिका में साइकिल के लिए अलग ट्रैक, विभिन्न जगहों पर एयर फिल्टर और एक ऐसे वेब पोर्टल बनाए जाने की मांग की है जहां प्रदूषण फैलाने वालों की शिकायत की जा सके।

कौशिक का कहना है कि प्रदूषण के मामले में सरकार की एजेंसियों का ढीला-ढाला रवैया सबसे बड़ा कारण है। किसी को यह नहीं पता है‌ कि पिछले 10-15 सालों में दिल्ली से कितनी ग‌ाड़ियों को बाहर किया गया या उनके इस्तेमाल पर रोक लगाई गई।

मंगलवार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद प्रदूषण की बढ़ती गंभीरता पर पूरे देश में बहस तेज हो गई है। हालांकि दिल्‍ली को डीजल से चलने वाली गाड़ियों से मुक्त शहर बनाना सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती है।
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