बिना सूचना के बिजली कटने पर अब बिजली वितरण कंपनियों को उपभोक्ताओं को मुआवजा देना होगा। पीड़ित उपभोक्ताओं को मुआवजे की रकम उनके बिल के साथ मिलेगी। हालांकि मरम्मत और रख-रखाव के नाम पर पहले से तय समय के अनुसार यदि बिजली कटौती होती है, तब डिस्कॉम्स को किसी तरह का जुर्माना नहीं देना होगा।
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हालांकि दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग के इस आदेश को डिस्कॉम्स ने व्यवहारिक नहीं बताया है और फैसले के खिलाफ ऊपरी अदालत में जाने की बात कह रही है।दिल्ली में बिजली कीमत और बिजली के नियम-कानून को नियंत्रित करने वाली संस्था दिल्ली विद्युत विनियामक आयोग (डीईआरसी) ने बिजली कटौती पर जुर्माने की अधिसूचना जारी कर दी है।
अलग-अलग कारणों से बिजली कटौती पर जुर्माने के लिए अलग-अलग राशि तय की गई है। हालांकि इस फैसले को लागू करने की घोषणा पिछले वर्ष जून में ही की गई थी, लेकिन इसकी अधिसूचना जारी करने में करीब एक वर्ष का समय लग गया। डिस्कॉम्स का कहना है कि दिल्ली सरकार ने जबरन इस फैसले को डीईआरसी से लागू करवाया है।
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जानिए क्या है जुर्माने का प्रावधान
अरविंद केजरीवाल
यह है जुर्माने का प्रावधान
एमसीबी फ्यूज होने और सर्विस लाइन में खराबी आने पर तीन घंटे में उसे ठीक करना होगा, नहीं तो प्रति घंटे प्रति उपभोक्ता 100 रुपये जुर्माना देना होगा। वितरण लाइन में गड़बड़ी होने पर यदि 100 से ज्यादा उपभोक्ताओं के घरों की बिजली जाती है, तब उसे दो घंटे में ठीक करनी होगी। इसके लिए पहले दो घंटे के लिए प्रति घंटे 50 रुपये देने होंगे, जबकि उसके बाद प्रति उपभोक्ता 100 रुपये चुकाने होंगे।
ट्रांसफार्मर में गड़बड़ी होने और 100 से ज्यादा उपभोक्ताओं के घरों की बिजली जाने पर पहले दो घंटे के लिए प्रति उपभोक्ता 50-50 रुपये, उसके बाद प्रति उपभोक्ता 100 रुपये जुर्माना देना होगा। इस गड़बड़ी को दो घंटे में ठीक करना होगा, नहीं तो जुर्माने की रकम पांच गुना तक बढ़ाई जा सकती है। 33 और 66 केवी की लाइन में गड़बड़ी होने पर दो घंटे में ठीक करना होगा।
सीएम केजरीवाल के मुताबिक डीईआरसी के फैसले का स्वागत करते हैं। कुछ दिन पहले पॉलिसी बनाकर डीईआरसी को दी थी। दिल्ली को वर्ल्ड क्लास सिटी बनाना है इसलिए यह जरूरी है। अभी बिजली कटौती होने पर उसे ठीक करने के लिए दो घंटे का समय दिया गया है। छह माह बाद एक घंटे में गड़बड़ी को ठीक करना होगा और यदि डिस्कॉम्स ऐसा नहीं कर पाती, तो मुआवजा ज्यादा देना होगा। जवाबदेही तय होनी चाहिए।
बिजली वितरण कंपनियों का कहना है कि इस फैसले को लागू करना व्यवहारिक नहीं है, लिहाजा इस अधिसूचना को अदालत में चुनौती दी जाएगी। जब तक स्मार्ट बिजली मीटर नहीं लगेंगे, तब तक इसे लागू करना मुश्किल है।
50 लाख बिजली मीटर लगाना इतना आसान नहीं है, इसमें कई सौ करोड़ रुपये खर्च करने होंगे और समय लगेगा। ट्रांसमिशन और जेनरेशन की गलती से यदि बिजली कटौती होती है अथवा उपभोक्ता के घर की अपनी बिजली समस्या होती है, ऐसी स्थिति में क्या होगा। कई अनाधिकृत कॉलोनियां ऐसी हैं जहां बिजली उपकरण लगाने के लिए जगह तक नहीं है वहां यदि बिजली कटती है तो डिस्कॉम्स की क्या गलती होगी और उसकी सजा उसे क्यों मिले।
खिड़की एक्सटेंशन, जहांगीरपुरी, नरेला, सीलमपुर, कल्याणपुरी, कोंडली, जामिया नगर, देवली, बटला हाउस और शाहीन बाग सहित कई ऐसे इलाके हैं, जहां इसे लागू करना पूरी तरह से अव्यवहारिक होगा। डिस्कॉम्स का कहना है कि पतंगबाजी से ट्रिपिंग होती है, जिससे एक बार में हजारों घरों की बिजली गुल हो जाती है, ऐसे में इस फैसले को लागू करना व्यवहारिक नहीं है।