एक सर्वे के मुताबिक दिल्ली के स्कूली बच्चों के फेफड़ें दूसरे शहरों की तुलना में ज्यादा कमजोर है। जिसका सबसे बड़ा कारण शहर की प्रदूषित हवा है।
चार शहरों के 2 हजार युवाओं पर किए गए इस सर्वे की रिपोर्ट सोमवार को जारी की गई। इसके अनुसार दिल्ली के 8 से 14 साल की उम्र के 40 फीसदी बच्चों के फेफड़ें कमजोर हैं।
सर्वे की माने तो शहर के 21 फीसदी बच्चों के फेफड़ें कमजोर और अन्य 19 फीसदी के खराब हैं। वहीं देश के हर तीसरे बच्चे के फेफड़ों को कमजोर आंका गया है।
दिल्ली की बाद इस मामले में बैंगलुरू 36 फीसदी के साथ दूसरे स्थान पायदान पर है। जबकि कोलकाता में 35 फीसदी और मुंबई में 27 फीसदी बच्चों के फेफड़ों को कमजोर बताया गया है।
खुले वाहनों का भी बच्चों पर असर
ये सर्वे हील फाउंडेशन द्वारा दिल्ली, मुंबई, बैंगलुरू और कोलकाता में कराया गया। इससे पहले भी एक सर्वे में राजधानी दिल्ली की गिनती विश्व के सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों में हो चुकी है।
इसके बाद कोर्ट के फैसलों और देश की पर्यावरण संबंधी संस्थाओं ने सुधार के प्रयास भी किए थे। लेकिन इन सुधारों का दिल्ली की सेहत पर कोई असर नहीं दिखा।
राजधानी के 18 लाख लोग सीधे तौर पर आज भी प्रभावित हैं।सर्वे का अहम बिंदु ये भी है कि जो बच्चे खुले वाहनों में आवागमन करते हैं, वे बंद वाहनों में आने-जाने वाले बच्चों की तुलना में प्रदूषण से ज्यादा प्रभावित हैं।
दिल्ली में तकरीबन 92 फीसदी बच्चे यातायात में खुले वाहनों का प्रयोग करते हैं।
अन्य शहरों के हालात दिल्ली से बेहतर
ऐसे ही आंकड़ें मुंबई, बैंगलूरू और कोलकाता से भी सामने आए हैं। हालांकि इन शहरों के हालात राजधानी दिल्ली से कुछ हद तक बेहतर हैं।
ये अध्ययन इन 4 शहरों के 14 स्कूलों पर 31 मार्च से 30 अप्रैल के बीच किया गया। इसमें 4 दिल्ली, 3 कोलकाता, 3 बैंगलूरू, और 4 मुंबई के शहर शामिल हैं।
सर्वे के मुताबिक बाहरी वायु प्रदूषण ही नहीं बल्कि घरेलू वायु प्रदूषण भी इसका प्रमुख कारण है। 70 से 80 फीसदी लोगों को इसकी जानकारी भी नहीं है।
दिल्ली सरदार पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर राज कुमार के मुताबिक उनके इंस्टीट्यूट ने भी 6 साल पहले एक सर्व कराया था।
बच्चों के फेफड़ों की खराब हालत के लिए घरेलू वायु प्रदूषण बाहरी वायु प्रदूषण जितना ही खतरनाक है।