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अब 'आप' नेता योगेंद्र-प्रशांत होंगे पार्टी से बाहर!

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आम आदमी पार्टी (आप) के भीतर छिड़ा घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। पार्टी फिलहाल दो गुटों में बंटी दिख रही है। दोनों गुट एक-दूसरे पर हावी होने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि पार्टी में भारी टीम केजरीवाल ही है। सूत्र बताते हैं कि विवादों का निपटारा दूसरे गुट में पार्टी में बने रहने तक नहीं थमेगा। लिहाजा मुमकिन है कि राजनीति मामलों की समिति (पीएसी) से निकाले जाने के बाद योगेंद्र यादव व प्रशांत भूषण को पार्टी से बाहर का रास्ता भी दिखाया जा सकता है।
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इस मामले में हालांकि औपचारिक तौर पर कोई जिम्मेदार पदाधिकारी बोलने से बच रहा है। लेकिन सोमवार को दिल्ली प्रदेश संयोजक आशुतोष ने कहा कि दोनों वरिष्ठ नेता हैं। उन्हें इसकी समझ है कि क्या करना है। पार्टी में रहने या निकालने का फैसला राष्ट्रीय परिषद की बैठक में होगा। जबकि पंजाब से आप सांसद भगवंत सिंह मान ने सीधा सपाट लहजे में कहा कि दोनों नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा देना चाहिए।

फिलहाल टीम केजरीवाल हावी

फिलहाल पार्टी के बड़े नेता भी मान रहे हैं कि आप दो हिस्सों में बंट गई है। वैचारिक मतभेद इतने गहरे हो गए हैं कि दोनों गुट एक साथ काम नहीं कर सकते। पीएसी से निकाले जाने के दूसरे महाराष्ट्र के आप नेता मयंक गांधी ने इसका विरोध किया। इसके तत्काल बाद अंजलि दमानिया ने मयंक पर हमला बोला। आप की राजस्थान व कर्नाटक युनिट में भी विरोध के सुर उठ रहे हैं। वहीं, सांसद भगवंत मान ने योगेंद्र यादव व प्रशांत भूषण को बाहर निकालने की बात कही।

सूत्र बताते हैं कि पार्टी में फिलहाल टीम केजरीवाल भारी पड़ रही है। कोशिश यही है कि दूसरे गुट का पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाए। यही वजह रही कि सोमवार को योगेंद्र
यादव को कहना पड़ा कि विरोधी विचारधारा के लोगों की भी पार्टी में जगह होनी चाहिए। वहीं, मयंक गांधी ने गीता का एक श्लोक ट्वीट किया। साथ ही यह भी कहा, आओ, अपनी अंतरआत्मा की आवाज पर काम करें और परिणाम की चिंता छोड़ दें।

दोनों नेताओं के बयान में साफ दिख रहा है कि वह हारी हुई लड़ाई लड़ रहे हैं। योगेंद्र यादव के नजदीकियों को भी अंदेशा है कि उन्हें पार्टी से निकाला जा सकता है। इस बारे में हालांकि टीम केजरीवाल का कोई सदस्य बोलने को तैयार नहीं है। लेकिन आशुतोष ने कहा कि दोनों पार्टी के बड़े नेता हैं। इस प्रकार के बयान मीडिया में क्यों दिये जा रहे हैं, समझ में नहीं आ रहा है। कुछ लोग न्यूनतम मर्यादा और अनुशासन का पालन नहीं कर रहे हैं। राष्ट्रीय परिषद की बैठक में इसका फैसला लिया जाएगा।
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आप के मिशन विस्तार पर भी चढ़ी सियासत

आरोपों-प्रत्यारोपों के बीच मिशन विस्तार पर भी सियासत हावी है। योगेंद्र यादव हरियाणा में किसान सभा के जरिए भूमि अधिग्रहण कानून के खिलाफ आंदोलन चला रहे हैं। इसके बैनर पर अरिंवद केजरीवाल की भी तस्वीर है। योगेंद्र यादव की कोशिश आम लोगों को अपने पीछे लामंबद करने की है। जिससे जरूरत पड़ने पर जनदबाव का सहारा भी लिया जा सके।

लेकिन हरियाणा यूनिट के दूसरे कद्दावर नेता नवीन जयहिंद ने इस अभियान से खुद का अलग रखा है। जयहिंद हरियाणा में मिशन विस्तार का काम कर रहे हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश व महाराष्ट्र में इसकी जिम्मेदारी संजय सिंह व अंजलि दमानिया पर है। दोनों टीम केजरीवाल के अहम सदस्य हैं। इसके जरिए कोशिश है कि राष्ट्रीय परिषद में अपने गुट के ज्यादा लोगों की इंट्री कराई जाए। जिससे मौका पड़ने पर इसके फैसले का अपने हक में किया जा सके।

मार्च के आखिर में होगी आप की राष्ट्रीय परिषद की बैठक
आम आदमी पार्टी (आप) की राष्ट्रीय परिषद की बैठक महीने के आखिर में होने की उम्मीद है। पार्टी सूत्र बताते हैं कि इसी बैठक में योगेंद्र यादव व प्रशांत भूषण के बारे में फैसला लिया जाएगा। इसकेअलावा दूसरे कई मसलों पर भी विचार होगा। 28 मार्च को इसकी बैठक बुलाई जा सकती है। हालांकि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल केबंगलुरू से वापस होने के बाद ही इसकी आधिकारिक घोषणा होगी। बता दें कि राजनीति मामलों की समित व राष्ट्रीय कार्यकारिणी के बाद राष्ट्रीय परिषद पार्टी की तीसरी मजबूत इकाई है। इस पर कार्यकारिणी के सदस्यों के चयन की अहम जिम्मेदारी है। परिषद के सदस्यों की संख्या करीब तीन सौ है।
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