32 घाटों पर कब्जा, यहां करीब 310 मकान बने, करीब 1100 लोग रह रहे
26 नोटिस जारीबाढ़ के खतरे को बताया घर खाली कराने का बड़ा कारण, निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित किया
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने साफ किया है कि यमुना बाजार घाट का इलाका ओ-जोन में आता है, जहां किसी तरह का निर्माण या कब्जा मान्य नहीं है। 32 घाटों पर कब्जा है, यहां करीब 310 मकान बने हैं, जिसमें करीब 1100 लोग रह रहे हैं, दिल्ली सरकार ने अतिक्रमण हटाने के लिए 26 नोटिस जारी किए हैं। दिल्ली सरकार के मुताबिक यमुना बाजार घाट क्षेत्र ‘ओ-जोन’ यानी बाढ़-मैदान क्षेत्र में आता है, जहां निर्माण और कब्जा पूरी तरह प्रतिबंधित है। यह जमीन दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) की है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि यमुना बाजार में कुल 32 घाट हैं, जिनमें बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हो चुका है। यहां करीब 310 मकान बने हुए हैं, जिनमें लगभग 1100 लोग रह रहे हैं। सरकार ने कहा कि ये इलाका हर साल बाढ़ के दौरान जलमग्न हो जाता है, खासकर 2023 और 2025 में यहां गंभीर स्थिति बनी थी। इससे लोगों की जान-माल और मवेशियों को बड़ा खतरा रहता है। हर बार प्रशासन को लोगों को अस्थायी रूप से हटाकर पुनर्वास करना पड़ता है, जिससे संसाधनों पर दबाव बढ़ता है।
एनजीटी ने घाट खाली कराने का निर्देश दिया है : नेशनल ग्रीन ट्रिब्यून (एनजीटी) ने डीडीए को यमुना के बाढ़-मैदानों में हुए अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं। इसी के तहत पिछले कुछ सालों में कई अवैध निर्माण हटाए भी गए हैं। अब प्रशासन ने डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट 2005 के तहत कार्रवाई तेज कर दी है। मौके पर मौजूद लोगों को 26 नोटिस जारी किए हैं, जिनमें 15 दिनों के अंदर जगह खाली करने का निर्देश दिया है। सरकार ने कहा कि यह कदम लोगों की सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण दोनों के लिए जरूरी है।