यूपी बॉर्डर पर चल रहे कृषि कानून विरोधी प्रदर्शन में रविवार को उत्सव जैसा रंग देखने को मिला जहां किसानों ने दंगल प्रतियोगिता का आयोजन किया। छोटे-बड़े महिला-पुरुष पहलवानों की बीच दर्जनों कुश्तियां हुईं। भीड़ ने जोश भरे नारे लगाकर पहलवानों का उत्साह बढ़ाया और ईनाम देकर उन्हें सम्मानित भी किया। सामान्य तौर पर यूपी गेट पर तीन से चार हजार किसानों का जमावड़ा रहा करता था, लेकिन रविवार को कुश्ती के आकर्षण में यहां भारी भीड़ इकट्टी हो गई।
'किसान जीत गए, दिल्ली हार गई'
दंगल के दौरान किसान पहलवानों का खूब जोश बढ़ा रहे थे। कुश्ती शुरू होने से पहले किसी पहलवान को दिल्ली तो किसी को मोदी, किसी को किसान और किसी को एक प्राइवेट कंपनी का मालिक बताकर पुकारने लगते। कुश्ती हो जाने के बाद नारा लगाते कि किसान जीत गए और दिल्ली (केंद्र सरकार) हार गई। दूर-दूर से आए किसानों का कहना था कि वे इसी तरह केंद्र सरकार को भी हराकर ही यहां से जाएंगे।
किसानों ने शुरूआती दौर में कपड़े, प्लास्टिक और तंबू के टेंट्स लगाए थे, लेकिन बीच में तीन-चार दिन लगातार बारिश होने पर किसानों को भारी परेशानी हुई। अब किसान आंदोलन में नए आधुनिक टेंट्स लगाए जा रहे हैं जिन्हें ज्यादातर सेना के जवान या पर्वतारोही अपने साथ लेकर जाते हैं। इन टेंट्स में विपरीत मौसम के बीच भी ज्यादा परेशानी नहीं होती है। किसानों का कहना है कि ये टेंट्स तो अस्थाई हैं और कुछ दिनों में उखड़ जाएंगे, लेकिन वे सरकार से ऐसे कानून बनवाकर जाएंगे जो पक्के होंगे।
सुप्रीम कोर्ट के पीछे न छिपे केंद्र सरकार
किसान नेता अविक साहा ने अमर उजाला से कहा कि केंद्र सरकार को अब यह समझ आ गया है कि किसान कानून को खत्म करने से कम किसी विकल्प पर विचार नहीं करेंगे। यही कारण है कि अब वह सुप्रीम कोर्ट के पीछे छिपकर आंदोलन को खत्म कराने का रास्ता खोज रही है। लेकिन सरकार की यह कोशिश कामयाब नहीं होगी। किसान नेता के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट किसी कानून की वैधता को चेक कर सकता है, लेकिन कोई कानून किसानों को चाहिए या नहीं, इसका निर्णय किसान ही करेंगे।
अविक साहा ने कहा कि केंद्र में जनता की चुनी हुई सरकार है और उसे जनता की समस्याओं का समाधान स्वयं खोजना पड़ेगा। वह यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकती कि सुप्रीम कोर्ट किसी कानून से सहमत है या नहीं। उन्होंने कहा कि कृषि कानून किसानों की समस्याओं का समाधान करने वाले नहीं हैं और ये उसे समस्याओं के नए जाल में उलझाने वाले हैं। ऐसे में इन कानूनों के खात्मे के अलावा किसी अन्य विकल्प पर विचार करना संभव नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट सोमवार को किसान आंदोलन पर एक महत्त्वपूर्ण मामले की सुनवाई करने वाला है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के बाद शाम को किसान नेता एक बैठक कर आंदोलन की अगली रणनीति तय करने वाले हैं। ऐसे में किसानों की इस बैठक को महत्त्वपूर्ण माना जा रहा है।