टीकरी बॉर्डर पर जारी किसान आंदोलन को रविवार को भी भारी जनसमर्थन मिला। पंजाब और हरियाणा से हजारों की संख्या में महिलाओं व मजदूरों का कारवां यहां पहुंचा और किसानों की आवाज के साथ अपनी आवाज बुलंद की।
टीकरी बॉर्डर पर संयुक्त किसान मोर्चा के मंच पर भारी जनसैलाब उमड़ा हुआ था। साथ ही भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) के बैनर तले हजारों महिला समर्थकों ने भी मोर्चा संभाल रखा था। भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) के अध्यक्ष जोगिंदर सिंह उगराहां ने बताया कि 3 हजार से अधिक महिलाएं किसानों के समर्थन में पहुंचीं। उन्होंने कहा कि किसान सरकार से हर मोर्चे पर बात करने के लिए राजी हुए। लेकिन सरकार से बातचीत का अब तक कोई नतीजा नहीं निकला।
उन्होंने कहा कि अब सरकार से बातचीत का कोई फायदा दिखाई नहीं दे रहा है। सरकार की मंशा ठीक होती तो वह अब तक किसानों की बात मान चुकी होती। लेकिन सरकार यह बात जान ले कि किसान अब बिना तीनों कृषि कानूनों को वापस कराए बिना यहां से वापस नहीं जाएंगे। चाहे किसानों को साल 2024 तक दिल्ली की सीमाओं पर ही क्यों ना बैठना पड़े। यहां पर बड़ी संख्या में बुजुर्ग महिलाएं भारतीय किसान यूनियन का झंडा थामें पहुंची थीं।
जोगिंदर सिंह ने कहा कि अब वह दिन दूर नहीं, जब पूरा पंजाब खाली होकर दिल्ली की सीमाओं पर आ जाएगा। सरकार को यह बात अबतक समझ में नहीं आ रही है। रविवार को टीकरी बॉर्डर पर उन किसानों के तिरपाल बदले गए, बरसात में जिनके तिरपाल फट गए थे। भारतीय किसान यूनियन के नेता पुरुषोत्तम उदत ने बताया कि हरियाणा के लोगों के सहयोग से दर्जनों किसानों की ट्रालियों पर तिरपाल बदले गए। उन्होंने कहा कि किसान अब इस बात से वाकिफ हो गए हैं कि अभी उनका यह आंदोलन लंबा चलेगा।