खराब होती जीवनशैली 90 फीसदी रोगों का कारण बन रही है। खाने-पीने की खराब आदत, तनाव, धूम्रपान, नशा व दूसरे कारण शरीर में मधुमेह, उच्च रक्तचाप सहित दूसरे रोग दे रहे हैं। इनके कारण दिल, दिमाग, लिवर, किडनी सहित दूसरे अंगों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा है।
विशेषज्ञों की मानें तो पिछले 20 सालों में खराब जीवनशैली ने उम्र घटा दी है। अब 25-30 साल के युवा भी तेजी से गंभीर रोगों के शिकार हो रहे हैं। यह आंकड़ा पहले 40 साल के ऊपर हुआ करता था। बढ़ती समस्या को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर विशेषज्ञों ने जीवनशैली को सुधारने का सुझाव दिया है। उनका कहना है कि यदि जीवनशैली को सुधारा जाता है तो 90 फीसदी तक समस्याओं को दूर कर सकते हैं। यही कारण है कि इस बार विश्व स्वास्थ्य दिवस की थीम मेरा स्वास्थ्य मेरा अधिकार रखा गया है। देश में पिछले कुछ सालों में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ी हैं, लेकिन यह सभी का कर्तव्य है कि वह जीवनशैली को सुधार कर स्वास्थ्य सेवाओं पर बोझ कम करें।
10 फीसदी रोग के दूसरे कारण
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में कार्डियोलॉजी विभाग के प्रोफेसर डॉ. तरुण कुमार का कहना है कि अस्पताल में आने वाले दिल के रोगी में 90 फीसदी कारण खराब जीवनशैली है। इसके कारण शरीर की क्रिया पर बुरा असर पड़ रहा है। यही कारण है कि पिछले 20 सालों में 25-35 साल की उम्र के युवा भी दिल के दौरे के शिकार हो रहे हैं।
रोगों के लिए खराब जीवनशैली बड़ा कारण : डॉ. पीयूष रंजन
एम्स में मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. पीयूष रंजन का कहना है कि रोगों के लिए खराब जीवनशैली बड़ा कारण है। इसे सुधारना हमारे हाथ में है। यदि हम खराब खाने-पीने की आदत, तनाव, चिंता व अन्य से दूर रहते हैं तो शरीर में रोग की घर करने की आशंका काफी कम हो जाती है। इसके अलावा बढ़ता प्रदूषण स्तर, खराब होता वातावरण भी रोग के लिए बड़ा कारण है। इनके कारण कैंसर जैसे घातक रोग बढ़े हैं, लेकिन यह हमारे हाथ में नहीं है। इन्हें रोकने के लिए केवल प्रयास कर सकते हैं।
बढ़ रहे थायराइड व मधुमेह के मामले
डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल में न्यूरोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. ज्योति गर्ग का कहना है कि खराब हुई जीवनशैली, खानपान की आदत व दूसरे कारणों से लोगों में तनाव, थायराइड, मधुमेह, बीपी सहित दूसरी समस्या बढ़ गई है। इनके कारण पिछले कुछ सालों में ब्रेन स्ट्रोक सहित न्यूरो संबंधित रोगों में बढ़त दर्ज हुई है। कम उम्र के युवाओं में आ रहे ब्रेन स्ट्रोक के मामले चिंताजनक हैं।