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देश में महिला अधिकारों की हालत बांग्लादेश से भी खराब

Wed, 03 Dec 2014 02:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग अध्यक्ष व सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश केजी बालाकृष्णन ने महिला सुरक्षा पर चिंता जताते हुए कहा कि भारत में महिला अधिकारों की स्थिति बांग्लादेश से भी ज्यादा खराब है। इसका सबसे बड़ा कारण शिक्षा है। बांग्लादेश में महिला शिक्षा बेहतर है। देश में महिलाओं की सुरक्षा व मानवाधिकार पर जागरूकता की बड़ी जरूरत है, जिसे शिक्षा से ही सुधारा जा सकता है।
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बालाकृष्णन ने मंगलवार को नोएडा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी (एनआईयू) में आयोजित ‘मानवाधिकार की चुनौतियां’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमीनार में ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि आयोग के पास लाखों महिलाओं की शिकायतें आती हैं। इनमें ज्यादातर महिला उत्पीड़न, पुलिस का रिपोर्ट दर्ज न करना, मारपीट, बुरा बर्ताव, छेड़खानी और जोर-जबरदस्ती से संबंधित हैं।

उन्होंने पुलिस से महिलाओं व बुजुर्गों का सम्मान बरकरार रखने की अपील करते हुए कहा कि समय की मांग पर संविधान में जो बदलाव हुए हैं, उनका पालन करना भी पुलिस का दायित्व है। उन्होंने भारतीय दंड संहिता की धारा 166-ए पर ध्यान आकर्षित कराते हुए कहा कि इसमें बदलाव के अब पुलिस थाने में प्राथमिकी दर्ज न करने पर छह माह की सजा भी हो सकती है। कानून में हुए बदलाव का पालन पुलिस को भी करना चाहिए।
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वहीं, इस मौके पर एनआईयू के चांसलर अरविंद कुमार सिंह ने कहा कि वास्तविक सामाजिक न्याय तभी मिल सकता है जब मानवीय अधिकारों की रक्षा करने के लिए लोग आगे आएं। सेमीनार में छात्रों ने शोध पत्र भी प्रस्तुत किए।

बालाकृष्णन ने कहा कि कुछ समय में उत्तर प्रदेश में मानवाधिकार से जुड़ी शिकायतों में बढ़ोतरी हुई है। आयोग के पास यूपी से आने वाली शिकायतों में 30 से 40 प्रतिशत महिलाओं के अधिकारों के हनन को लेकर हैं।
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