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किसान आंदोलनः छह पहरेदारों के सुरक्षा कवच के बीच टेंट में रहती हैं 70 महिलाएं 

Wed, 30 Dec 2020 03:33 AM IST
दुष्यंत शर्मा किशन कुमार, नई दिल्ली
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सिंघु बॉर्डर पर महिला प्रदर्शनकारी - फोटो : अमर उजाला/पीटीआई
सिंघु बॉर्डर पर मंच से करीब 300 मीटर की दूरी पर 200 मीटर के क्षेत्र में टेंट सिटी में 70 महिलाएं 6 पहरेदारों के सुरक्षा कवच के बीच रह रही हैं। यह पहरेदार 24 घंटे महिलाओं के लिए सुरक्षा के लिए खड़े रहते हैं। इस बीच किसी भी पुरुष का टेंट क्षेत्र में प्रवेश करना नामुमकीन है। 
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सिंघु बॉर्डर पर महिला प्रदर्शनकारी - फोटो : पीटीआई
दरअसल, सिंघु बॉर्डर पर कृषि कानूनों के विरोध में किसानों को समर्थन देने पंजाब और हरियाणा से बड़ी संख्या में महिलाएं भी पहुंची हैं। इनमें कुछ ऐसी महिलाएं भी शामिल हैं जो सिर्फ महिलाओं के जत्थे के साथ ही आई हैं। ऐसे में रात के समय बॉर्डर पर रुकने पर महिलाओं को समस्या भी हो रही थी। इसको देखते हुए दिल्ली के एक संगठन ने महिलाओं के रुकने के लिए टेंट की व्यवस्था की है।महिलाओं के लिए बॉर्डर पर करीब 200 मीटर के दायरे में 70 टेंट को लगाया गया है जिनमें केवल महिलाओं के रुकने के लिए अनुमति है। महिलाओं की सुविधा को देखते हुए टेंट के नजदीक ही एक महिला शौचालय की भी व्यवस्था की गई है जिससे रात के समय महिलाओं को दूर न जाना पड़े। 
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सिंघु बॉर्डर का एक दृश्य - फोटो : अमर उजाला
रात के समय कड़े पहरे में रहती हैं महिलाएं
टेंट सिटी के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार रुपेंद्र ने बताया कि सुबह होते ही महिलाएं टेंट को छोड़कर प्रदर्शन में शामिल हो जाती हैं। इसके बाद शाम 7 बजे से टेंट में महिलाएं लौट आती हैं। महिलाओं के टेंट में लौटने के बाद 70 टेंट के आसपास करीब 6 पुरुष पहरेदार कड़ा पहरा देते हैं। इस दौरान नजर रखी जाती है कि कोई भी पुरुष महिलाओं के टेंट के भीतर प्रवेश न कर सके जिससे महिलाओं के निजता का हनन होने से रोका जा सके। 

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सिंघु बॉर्डर पर महिला प्रदर्शनकारी - फोटो : अमर उजाला
रहने के अभाव के कारण लौटने लगी थी महिलाएं
रुपेंद्र ने बताया कि कुछ महिलाएं अपने परिवार के साथ गाड़ी में यहां पहुंची थी। ऐसे में एक-दो दिन गाड़ी में बिताने के बाद रहने की व्यवस्था न होने के कारण महिलाएं लौटने लगी थीं। इसको देखते हुए यहां पर महिलाओं के रहने के लिए व्यवस्था की गई है। ऐसे में जब से महिलाओं को टेंट सिटी के बारे में पता चला है तो तब से महिलाएं अपने गांव लौटने के बजाय अब यहीं रुककर आंदोलन का हिस्सा बन रही हैं। टेंट में महिलाओं के लिए गद्दे कंबल आदि बिस्तर की पूरी व्यवस्था की गई है। 
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टेंट सिटी बना सिंघु बॉर्डर - फोटो : अमर उजाला
नाम पता और मोबाइल नंबर से दिया जाता है टेंट
महिलाओं के लिए बनाए गए 70 टेंट में अभी सभी टेंट पूरी तरह से भरे हैं। कुछ टेंट में परिवार भी रह रहे हैं। टेंट संचालन से जुड़े एक सदस्य ने बताया कि महिलाओं को टेंट देने के लिए उनका नाम, पता और मोबाइल नंबर दर्ज किया जाता है। इसके बाद उन्हें निशुल्क रूप से टेंट उपलब्ध करा दिया जाता है। उन्होंने बताया कि महिलाओं पर निर्भर करता है कि वह कितने दिन तक टेंट में रहना चाहती हैं। इसके लिए कोई समय सीमा तय नहीं की गई है। ऐसे में जब तक महिलाएं चाहे टेंट में रहकर आंदोलन का हिस्सा बन सकती हैं।  
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