फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

विज्ञान का चमत्कार: महिला बन गई पुरुष, दांपत्य जीवन में किया प्रवेश, छह साल से करवा रही थी सर्जरी

Tue, 22 Nov 2022 06:49 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

चिकित्सकों का कहना है कि बीते छह सालों से उसके अलग-अलग अंगों की सर्जरी चल रही है। 2016 से उसने पुरुष हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी करवाई थी।
विज्ञापन
महिला बन गई पुरुष - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

जेंडर डिस्फोरिया से पीड़ित उत्तर प्रदेश की 34 वर्षीय महिला जेंडर बदलवाकर पुरुष बन गई है और उसने अपनी महिला साथी से शादी भी कर ली है। होश संभालने के बाद से ही वह खुद को पुरुष मानती थी। इस दुविधा से खुद को मुक्त करने के लिए उसने करीब छह साल पहले अपना जेंडर बदलवाने का फैसला किया। इस बीच उसके शरीर के अलग-अलग अंगों की सर्जरी की गई। छह सप्ताह पहले उसके शरीर का आखिरी अंग बदला गया। चिकित्सकों का कहना है कि इसके बाद उसको निगरानी में रखा गया। अब वह पूरी तरह स्वस्थ है। उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।

विज्ञापन


चिकित्सकों का कहना है कि बीते छह सालों से उसके अलग-अलग अंगों की सर्जरी चल रही है। 2016 से उसने पुरुष हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी करवाई थी। 2017 व 2019 में स्त्रीत्व से जुड़े शरीर के अंदर के अंगों को हटाया गया। जबकि सर्जरी से उसमें शुरू से पुरुष की तरह सभी लक्षण थे। पुरुष की तरह उसे भी दाढ़ी, छाती पर बाल आते थे। उसकी आवाज भी पुरुषों की तरह भारी थी और उसका व्यवहार भी पुरुषों की तरह था।

सर गंगा राम अस्पताल के डिपार्टमेंट ऑफ प्लास्टिक एंड कॉस्मेटिक सर्जरी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. भीम सिंह नंदा ने बताया कि इस सबके बाद वह दो महीने पहले 34 वर्षीय महिला अस्पताल में जेंडर बदलवाने आई।
विज्ञापन

जांच के बाद पाया गया कि महिला होने के बाद भी मानसिक रूप से वह पुरुष थी। इसे जेंडर डिस्फोरिया कहा जाता है। वह पिछले छह साल में कई सर्जरी करवा चुकी थी। नंदा के मुताबिक, महिला के कहने पर टिश्यू ट्रांसफर के आधुनिक माइक्रो-सर्जिकल तकनीक से महिला के हाथ से पुरुष का प्राइवेट पार्ट बनाया गया। इसको के लिए हाथ और कलाई (फोरआर्म) को डोनर के रूप में चुना। इसे तैयार करने के बाद महिला के प्राइवेट पार्ट की जगह इसे प्रत्यारोपित किया गया। डॉ. नंदा ने कहा कि इसके बाद मूत्र नली से जोड़ना और उसमें रक्त के प्रवाह को फिर से शुरू करने के लिए धमनियों को जोड़ना बड़ी चुनौती थी। करीब 8 घंटे चली सर्जरी के बाद यह सफलतापूर्वक स्थापित किया गया। सर्जरी के छह सप्ताह बाद वह पूरी तरह से स्वस्थ है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें