दिल्ली सरकार ने स्कूलों के रख-रखाव को बेहतर बनाने के लिए नियुक्त किए गए एस्टेट मैनेजर के लिए एक मोबाइल ऐप लॉन्च किया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने त्यागराज स्टेडियम में सभी सरकारी स्कूलों के प्रधानाचार्यों और एस्टेट मैनेजरों की मौजूदगी में ऐप लॉन्च किया। बीते कई दिनों से यह एप ट्रायल आधार पर चल रहा था। इसके माध्यम से सरकार को स्कूलों की पल-पल की जानकारी मिल सकेगी। ऐप से एस्टेट मैनेजर रोजाना स्कूल की स्टेटस रिपोर्ट भेजेंगे।
दिल्ली सरकार की योजना इस ऐप को अगले तीन माह में सभी को उपलब्ध कराने की है। कुछ दिनों बाद अभिभावक भी ऐप की मदद से स्कूलों की साफ-सफाई व अन्य जानकारी ले सकेंगे। एस्टेट मैनेजर इसी मोबाइल ऐप पर रोज सुबह 8.15 बजे स्कूल में साफ-सफाई, सिक्योरिटी, पीने के पानी, कक्षाओं में ट्यूब लाइट्स व पंखे की स्थिति की रिपोर्ट सरकार को भेजेंगे। एस्टेट मैनेजर को मोबाइल ऐप पर फोटो और वीडियो भी अपलोड करना होगा। इनसे जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए नौ बजे प्रधानाचार्य व स्कूल प्रमुख को जरूरी कार्रवाई करके रिपोर्ट मोबाइल ऐप पर ही करनी होगी। इसके बाद 10.30 बजे उप शिक्षा निदेशक जोन को इन समस्याओं के समाधान के लिए जरूरी एक्शन लेना होगा और उसकी रिपोर्ट मोबाइल ऐप पर ही अपलोड करनी होगी। रोजाना 11 बजे तक दिल्ली के सभी सरकारी स्कूलों की स्टेट्स रिपोर्ट शिक्षा निदेशक और उप मुख्यमंत्री के मोबाइल पर होगी।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ऐप बनाने वाली कंपनी माइंडट्री का धन्यवाद दिया, जिन्होंने निशुल्क एप तैयार किया है। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों को प्राइवेट स्कूलों से बेहतर बनाने का सपना अगले दो सालों में पूरा कर लेंगे। उप मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया ने कहा कि हमने स्कूल प्रधानाचार्यों की समस्या के समाधान के लिए हर स्कूल को एस्टेट मैनेजर दे दिया है। इस मोबाइल ऐप से ये भी जानकारी मिल सकेगी कि इन समस्याओं को लेकर कहां-कहां कार्रवाई नहीं हो रही है। मसलन यदि जल बोर्ड या पीडब्लयूडी समस्या हल करने में देरी करेंगे तो उन पर भी कार्रवाई होगी।
10वीं के बच्चों को विद्यालय लिखना नहीं आता
मोबाइल ऐप लॉन्च के दौरान उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया ने उदाहरण देते हुए बताया कि बीते सप्ताह वे एक स्कूल में गए, जहां इमारत, साफ-सफाई, हरियाली सभी बेहतर था। लेकिन दसवीं कक्षा में जाने पर दुख हुआ। वहां छुट्टी के लिए लिखी गई तीन अर्जी थीं, जिनमें काफी गलतियां थीं। शादी, विद्यालय जैसे शब्द गलत थे। कक्षा के बच्चों से यही शब्द लिखने के लिए कहा तो करीब 20 फीसदी बच्चों ने शादी और आपकी शब्द में गलत मात्राएं लगाईं। विद्यालय शब्द करीब 50 फीसदी बच्चों ने गलत लिखा। ब्राह्मण लिखने में करीब 70 फीसदी बच्चों ने गलती की। उन्होंने कहा कि सभी सुविधाएं स्कूलों को दी जा रही हैं, लेकिन अगर बच्चे पढ़ नहीं पा रहे तो सरकार की कोशिश बेकार है।