जानकर हैरानी होगी कि आरटीआई से सूचना मांगना कितना मंहगा पड़ सकता है। हालत ये भी हो सकती है कि आपको अदालत का सहारा लेना पड़ जाएं। ऐसा ही एक मामला सामने आया है गांव ढ़ाढ़ोलीकलां में।
ढ़ाढ़ोलीकलां के आरटीआई कार्यकर्ता फकरुद्दीन पुत्र सिब्बन ने अपने मिडिल स्कूल में हो रही धांधली की सच्चाई जानने के लिए 03 जनवरी 2015 को सूचना के अधिकार कानून के तहत कई सवाल पूछे थे। मुख्याध्यापक ने आरटीआई कार्यकर्ता और बीईओ को पत्र भेजकर संबंधित सूचनाऐं 6150 पेज में बताई। ये भी लिखा कि प्रत्येक पेज के पांच रुपये के हिसाब से 30750 रुपये जमा कराने पर ही जानकारी मिलेगी।
आरटीआई कार्यकर्ता फकरुद्दीन के मुताबिक वह पत्र पढ़कर हैरान हो गया, वह बीपीएल परिवार से संबंध रखता है। तो उसे मुफ्त में शिक्षा विभाग की तरफ से सूचनाऐं उपलब्ध होनी चाहिए। इस बाबत फकरूदीन ने विभाग के निदेशक को अपील डालकर निशुल्क सूचनाएं देने की गुहार लगाई। निदेशक के आदेश के बाद नगीना के बीईओ कार्यालय ने आरटीआई कार्यकर्ता को निशुल्क 162 पेज मुहैया करा दिये। सवा साल से ज्यादा का वक्त बीत चुका है। किंतु अभी तक 6150 पेज की जानकारी उसे नहीं मिली।
कार्यकर्ता का आरोप है कि उसे कई प्रकार से प्रताड़ित किया जा रहा है। फिलहाल मामला फिरोजपुर झिरका की अदालत में पहुंच चुका है। इस मामले में आरटीआई कार्यकर्ता ने जेई और एसडीओ को पार्टी बनाया है। फकरुद्दीन का आरोप है कि गांव के सरकारी स्कूल में मिड-डे मील, निर्माण सामग्री, शौचालय और एसएमसी के जरिये काफी अनियमित्ताऐं थीं। मेवात आरटीआइ मंच ने पांच रुपये प्रति कापी मांगने वाले जनसूचना अधिकारी को तुरंत बरखास्त करने की मांग की है।