पावर कारपोरेशन ने उपभोक्ता अदालतों को अब जिला स्तर पर स्थापित करने जा रहा है। अभी तक ये अदालतें मंडल स्तर पर हैं। ऐसे में उपभोक्ता परेशानी लेकर इन अदालतों तक नहीं पहुंच पाते हैं और कारपोरेशन अफसर उनका शोषण करते हैं।
इसके साथ ही अब तहसील व थाना दिवसों में भी बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं को सुना जाएगा। उपभोक्ता अदालतों के आदेश के खिलाफ कारपोरेशन अफसर अपील नहीं कर सकेंगे।
यह है स्थिति
पावर कारपोरेशन के खिलाफ पुलिस, जिला प्रशासन और कोर्ट में सीधे तौर पर कार्रवाई नहीं होती है। उपभोक्ताओं को अपनी शिकायत पावर कारपोरेशन की व्यथा निवारण अदालतों में रखने को प्रेरित किया जाता है, लेकिन इसकी प्रक्रिया जटिल है।
ये अदालतें केवल मंडल स्तर पर हैं। ऐसे में उपभोक्ता वहां तक नहीं पहुंच पाते हैं। आलम यह है कि अफसरों को मिलने वाली शिकायतों के सापेक्ष मात्र 0.05 फीसदी मामले ही उपभोक्ता अदालतों में पहुंच पाते हैं। दूसरी ओर अफसरों के टालमटोल रवैये से पावर कारपोरेशन के साथ ही सरकार की भी छवि खराब होती है।
यह है तैयारी
रिटायर्ड जज और विद्युत उपभोक्ता अदालत मेरठ मंडल के अध्यक्ष एकेअग्रवाल ने बताया कि उपभोक्ता अदालतों को अब मंडल की बजाय जिला स्तर पर स्थापित किया जाएगा।
यह काम जनवरी से शुरू होगा। अदालतों में शिकायत करने की प्रक्रिया भी सरल की जाएगी। तहसील व थाना दिवसों में मिलने वाली शिकायतें भी उपभोक्ता अदालतों में सुनी जाएंगी।