केंद्र सरकार ने सीएनजी वाहन फिटनेस घोटाला जांच आयोग के मामले में ऐसी चिट्ठी भी भेजी है, जिसमें उपराज्यपाल निवास से सभी अधिकारियों को पत्र भेजकर केंद्र की बात मानने के लिए कहा गया है।
मुख्यमंत्री कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ढाई महीने बीत जाने के बाद भी सेवानिवृत्त जज की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय महिला सुरक्षा जांच आयोग के गठन को उपराज्यपाल से मंजूरी नहीं मिली है, लेकिन हम हाथ पर हाथ धरे बैठे नहीं रह सकते।
अब बिना अनुमति के सीएनजी फिटनेस घोटाला जांच आयोग की तर्ज पर आयोग का गठन कर देंगे। राजधानी में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध और गंभीर स्थिति से निपटने, संबंधित एजेंसी की उदासीनता और असमर्थता को आधार बनाकर जांच आयोग अधिनियम, 1952 की धारा 3 के अनुसार जांच आयोग गठन का प्रस्ताव विधानसभा में पास किया गया था।
जांच आयोग को दी जाएगी ये जिम्मेदारी
-जस्टिस वर्मा समिति की सिफारिशों के आधार पर फरवरी, 2013 से आईपीसी, सीआरपीसी में संशोधन के बाद महिलाओं के विरुद्ध हिंसा, यौन शोषण, स्टॉकिंग, छेड़छाड़ की नहीं सुनी गई शिकायतों को ढूंढकर दिल्ली सरकार को सुझाव देना।
-वर्तमान कानून में महिला सुरक्षा के लिए अगर कोई संशोधन की जरूरत है तो सुझाव देना।
-जांच किए गए मामलों में उदासीनता या मिलीभगत का मामला सामने आने पर इस विषय में सरकार को सिफारिश देना।
-महिलाओं से जुड़े सभी आपराधिक मामलों की पूरी कार्रवाई को जल्द निपटाने के लिए सुझाव देना।
-वर्तमान कानूनी प्रावधानों के साथ-साथ जस्टिस वर्मा समिति की सिफारिशों को उपयुक्त ढंग से लागू करने और ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, उसके लिए सुझाव देना।
केंद्र सरकार या उपराज्यपाल की नहीं ली अनुमति
दिल्ली सरकार महिला सुरक्षा के मामले में केंद्र सरकार से सीधे टक्कर लेने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार या उपराज्यपाल से स्वीकृति के बिना ही महिलाओं के खिलाफ हिंसा, यौन शोषण, स्टॉकिंग, छेड़छाड़ की शिकायतों की पड़ताल के लिए जांच आयोग के गठन का ऐलान किया है।
केजरीवाल ने कहा है कि अगले एक हफ्ते में महिला सुरक्षा जांच आयोग का गठन सरकार कर देगी। 3 अगस्त को विधानसभा के विशेष सत्र में इस जांच अयोग के गठन का संकल्प पास किया गया था।
हालांकि सरकारी प्रक्रिया के विशेषज्ञ बताते हैं कि कानून में यह जरूरी है कि ऐसे आयोग के गठन के लिए उपराज्यपाल की अनुमति ली जाए। ऐसा नहीं किए जाने से आयोग गैर कानूनी माना जाता है।