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क्या सात रेस कोर्स के सामने झुग्गी पर बनेंगे आशियाने?

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में जहां झुग्गी वहां पर बनेंगे आशियाने की घोषणा तो कर दी, लेकिन सपना पूरा करने में कई पेच हैं। क्योंकि कई झोपड़ियां राजधानी के विकास की जद में आती हैं, जहां निर्माण कार्य या तो संभव नहीं या फिर सुरक्षा कारण मुद्दा है। सूत्रों के अनुसार दिल्ली के दंगल में मतदाताओं को लुभाने वादों से रिझाया जा रहा है। दिल्ली में करीब 20 फीसदी झुग्गी झोपड़ियां ऐसे स्थानों पर हैं जहां पर निर्माण कार्य संभव नहीं है। दिल्ली में करीब 672 क्लस्टर हैं, जिसमें करीब छह लाख झुग्गियां है। इनमें करीब 25 लाख मतदाता है।
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सात रेस कोर्स रोड पर प्रधानमंत्री निवास के सामने रेस क्लब के दोनों ओर झुग्गी-झोपड़ियां हैं। तीन ओर से एयरफोर्स के ऑफिस हैं तो बीच में रेस क्लब और सामने रेस कोर्स मार्ग। भाई राम कैंप जेजे क्लस्टर के नाम से झुग्गी-झोपड़ियां रजिस्टर्ड हैं। यहां करीब 466 झोपड़ियां हैं, जिसमें करीब दो हजार मतदाता हैं। जबकि दूसरी ओर अनाधिकृत झुग्गियां हैं, जिसमें 266 झोपड़ियां हैं।

नियम के मुताबिक, मुख्य सड़कों के करीब दस फीट तक निर्माणकार्य नहीं किया जा सकता है, लेकिन मदर डेयरी और पटपड़गंज रोड के बीच स्थित रामदास कैंप का अतिक्रमण फुटपाथ तक फैला हुआ है। महज तीन सौ मीटर के एरिया में साढ़े चार सौ झुग्गियां बनी हुई हैं।
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ऐसे कैसे बनेंगे झुग्गियों की जगह घर

भारतीय सेना के तीनों अंगों थल, जल व वायु सेना के कार्यालयों के आसपास सिविलियन को घर बनाने की आज्ञा नहीं है। जबकि एक ओर प्रधानमंत्री निवास की सुरक्षा तो दूसरी ओर एयरफोर्स स्टेशन के कार्यालय होने केचलते भाई राम कैंप जेजे क्लस्टर के स्थान पर ऊंची बिल्डिंग बनाकर वहां के बाशिंदों को शिफ्ट करने में बीजेपी को कानूनी पेच फंस सकते हैं। क्योंकि ऊंची बिल्डिंग होने से एयरफोर्स स्टेशन समेत रेस कोर्स तक आसानी से सुरक्षा में सेंध लगायी जा सकती है।

यह जगह सवाई मान सिंह ने दान दी थी, जिसके बाद अब एनडीएमसी का कब्जा है। एनडीएमसी ने ही बिजली, पानी समेत सफाई का जिम्मा उठाया हुआ है।  एयरफोर्स की तीन ओर से दीवार सटी होने के चलते यहां कभी दिक्कत नहीं होती। मोदी की घोषणा से खुश हैं कि हमें पक्के मकानों में रहने का लाभ मिलेगा।

मोदी की घोषणा के बाद से झुग्गियों में खुशी की लहर है। हालांकि दिल्ली के ही नियम के मुताबिक, यहां निर्माणकार्य संभव नहीं है। क्योंकि नीचे गैस पाइप लाइन भी जा रही है। यदि यहां बिल्डिंग बनती हैं तो अवश्य लोगों को फायदा होगा। हालांकि योजना पूरी होने में संदेह है।
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