मुंह में कपड़ा ठूंसकर किया था हमला
22 सितंबर 2004 को दिल्ली पुलिस को सूचना मिली थी कि एक किराएदार ने अपनी पत्नी और बच्चे पर हमला करने के बाद कमरा खाली कर दिया था। मौके पर पहुंची पुलिस टीम को एक महिला खून से लथपथ अवस्था में मिली, जिसके मुंह पर कपड़ा ठूंसा गया था। उसके पास टूटी चूड़ियां, खून से सना एक ईंट और एक टूटा हुआ दांत भी बरामद हुआ। डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस (क्राइम) आदित्य गौतम ने बताया कि जांच में पता चला कि वीरपाल अपनी शादी से खुश नहीं था और अपनी पत्नी के साथ उसका रिश्ता तनावपूर्ण था।
बच्चे ने की थी पिता और चाचा की पहचान
हादसे के दिन घायल अवस्था में मिले वीरपाल के एक बच्चे ने अपने पिता वीरपाल और चाचा सुरेश उर्फ सैजू को हमलावर के रूप में पहचाना था। पुलिस ने सह-आरोपी सुरेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया था, जिसे 2007 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। हालांकि, वीरपाल फरार हो गया और 21 साल तक पुलिस की पकड़ से बाहर रहा।
दूसरी शादी की, तीन बेटियों का बना बाप
पुलिस के अनुसार, फरार होने के बाद वीरपाल ने फर्रुखाबाद में अपनी पैतृक संपत्ति बेच दी और अपने गांव से सारे संबंध तोड़ लिए। उसने विजय उर्फ रामदयाल के नाम से नई पहचान बनाई और लखनऊ में रहने लगा। इस दौरान उसने दूसरी शादी की और दूसरी पत्नी से तीन बेटियों का पिता बना। वह दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम कर रहा था।
ऐसे किया गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की न्यू दिल्ली रेंज यूनिट को वीरपाल के लखनऊ में छिपे होने की गुप्त सूचना मिली थी। इसके आधार पर एक विशेष टीम ने लखनऊ में छापेमारी की और उसे गिरफ्तार कर लिया। डीसीपी आदित्य गौतम ने बताया कि पूछताछ के दौरान वीरपाल ने अपने अपराध को कबूल कर लिया।