इसके बाद मिंटू को सिक्योरिटी एजेंसी में नाइट शिफ्ट पर नौकरी दे दी। 10 दिसंबर 2015 को मिंटू ने कांति और आलोक को अपने कमरे में आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया।
गुस्से में उसने आलोक को तमाचा मारा और जान से मारने की धमकी देते पुलिस से शिकायत की भी चेतावनी दी। मिंटू शराब पीने का आदी था, इसलिए बात बिगड़ने से पहले ही आलोक ने दोस्त जितेंद्र को शराब देकर मिंटू के पास भेज दिया।
जितेंद्र ने उसी रात मिंटू के साथ बैठकर शराब पी और आलोक के प्रति उसके मन में भरे गुस्से को खत्म कर दिया। इसके बाद जितेंद्र ने मिंटू और आलोक की फोन पर बात करा सुलह भी करा दी।
इसके बाद भी आलोक को डर था कि मिंटू उनके अवैध संबंध में बाधक बन सकता है। लिहाजा उसने कांति और जितेंद्र के साथ मिलकर हत्या की साजिश तैयार की।
साजिश के तहत आलोक व जितेंद्र ने 13 दिसंबर 2015 को मिंटू के कमरे पर साथ शराब पी। इसके बाद मिंटू को बहाने से बाइक पर बाहर ले गए और रस्सी से उसके हाथ बांधकर गला घोंट दिया।
इसके बाद शव को फेज दो के एक नाले में फेंक दिया गया। वापस आकर आलोक ने कांति को मिंटू की हत्या की बात बता दी।
हत्या के तीन दिन बाद 16 दिसंबर 2015 को थाना फेज दो पुलिस ने मिंटू का शव सड़ी-गली हालत में बरामद कर लिया, लेकिन उसकी पहचान नहीं हो सकी।
हत्या के बाद से आलोक व जितेंद्र लगातार पोस्टमार्टम हाउस जाकर ये सुनिश्चित करते रहे कि मिंटू के शव का अंतिम संस्कार लावारिस में हुआ या नहीं।
थाना फेज दो पुलिस ने हत्या की रिपोर्ट दर्ज कर निर्धारित अवधि के बाद शव का लावारिस में अंतिम संस्कार करने के बाद आलोक ने 22 दिसंबर 2015 को कांति को थाना सेक्टर-39 भेजकर मिंटू की गुमशुदगी दर्ज करवा दी।
कांति ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि उसका पति 13 दिसंबर को नौकरी की तलाश में निकला था, लेकिन अब तक नहीं लौटा है। हालांकि कांति ने साजिश के तहत पुलिस को पति की तलाश करने के लिए फोटो नहीं दी थी।
शव की शिनाख्त न होने और जांच में कोई प्रगति न होने पर थाना फेज दो पुलिस ने मई 2016 में हत्या के मामले में अंतिम रिपोर्ट लगा दी।
मिंटू का कोई पता न चलने और पत्नी द्वारा उसकी तलाश के लिए दिलचस्पी न लेने पर मिंटू के बड़े भाई लालमन द्विवेदी ने अक्तूूबर 2016 में कोर्ट के आदेश पर थाना सेक्टर-39 में भाई का अपहरण कर हत्या की आशंका जताते हुए रिपोर्ट दर्ज करा दी।
साथ ही उसने भाई की गुमशुदगी व हत्या की आशंका के पीछे कांति और सास अनसूर्या पर संदेह व्यक्त किया। इसके बाद पुलिस ने कांति के खिलाफ कोर्ट से वारंट लेकर तलाश शुरू कर दी।
2 मई 2018 को मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने कांति को सलारपुर बस स्टैंड के पास से गिरफ्तार कर लिया। आलोक भी बाइक से वहां मौजूद था। कांति से पूछताछ के आधार पर पुलिस ने जितेंद्र को भी गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में जितेंद्र ने मिंटू की 13 दिसंबर 2015 को हत्या कर शव फेज दो के नाले में फेंकने की बात बताई। इसके बाद पुलिस ने जिपनेट पर 16 दिसंबर 2015 को फेज दो में मिले लावारिस शव की फोटो कांति व जितेंद्र को दिखाई तो दोनों ने उसकी शिनाख्त कर ली।
मिंटू की गुमशुदगी के बाद उसका भाई लालमन व परिजन कई बार कांति और सास अनसूर्या पर हत्या का संदेह व्यक्त कर चुके थे। शुरू से ही मिंटू के परिवार को कांति पर संदेह था।
पुलिस ने कई बार कांति और आलोक को थाने बुलाकर पूछताछ की। हर बार कोई सुराग न मिलने पर पुलिस इन्हें छोड़ देती थी।
आलोक की पत्नी को भी पता है अवैध संबंध की बात
थाना सेक्टर-39 प्रभारी निरीक्षक अवनीश दीक्षित ने बताया कि आलोक ने वर्ष 2014 में गोल्डी नाम की महिला से शादी की थी। उसे भी वह कानपुर से भगाकर लाया था।
गोल्डी को आलोक और कांति के अवैध संबंधों की जानकारी थी, लेकिन वह इसका विरोध नहीं करती थी। उल्टा पुलिस जब भी आलोक को पूछताछ के लिए पकड़कर थाने लाती थी, गोल्डी ही जगह-जगह पत्र भेजकर उसके पति को पुलिस द्वारा प्रताड़ित करने का आरोप लगा छुड़ा लाती थी।