दिल्ली चुनाव के मद्देनजर अभी आम आदमी पार्टी या फिर भारतीय जनता पार्टी किसी ने मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा नहीं की है। लेकिन आप दिल्ली चुनाव को केजरीवाल बनाम जगदीश मुखी बनानी चाहती है। जबकि भाजपा बार-बार सामुहिक नेतृत्व में दिल्ली चुनाव लड़ने की बात कर रही है।
भाजपा में आमतौर पर चुनाव से पहले ही प्रमुख पदों के उम्मीदवारों की घोषणा करने की परंपरा रही है। लेकिन इस बार पार्टी दिल्ली में ऐसा करने से कतरा रही है। भाजपा दिल्ली चुनाव को महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनावों की तर्ज पर लड़ने की बात कर रही है।
पर महाराष्ट्र और हरियाणा की चुनावी पृष्ठभूमि अलग थी। दोनों ही राज्यों में पहली बार भाजपा को इतना बड़ा जनमत मिला है। पार्टी के पास उन दोनों ही राज्यों में कोई ऐसा दमदार चेहरा नहीं था, जिसे पार्टी मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बना सके और न ही मजबूत जनाधार। लेकिन दिल्ली में तो ऐसा नहीं है, फिर भाजपा क्यों घबरा रही है।
क्या दिल्ली में भी भाजपा के पास कोई दमदार नेता नहीं है?
सवाल यही पर खड़ा होता है कि क्या दिल्ली में भी भाजपा के पास कोई ऐसा चेहरा नहीं है? क्या दिल्ली में भी पार्टी अपने जनाधार को लेकर संशय में है? आप इसी संशय का फायदा उठाना चाहती है। आप नहीं चाहती कि दिल्ली चुनाव मोदी बनाम केजरीवाल हो। क्योंकि इस फैक्टर का अंजाम आप वाराणसी में देख चुकी है।
इसिलए आप ने जगदीश मुखी का नाम भाजपा के सीएम उम्मीदवार के तौर पर उछाल दिया। दअरसल जगदीश मुखी पर जोड़तोड़, भ्रष्टाचार समेत कई तरह के आरोप लगते रहे हैं। चुनावी मोड में आई आप ने इसी को ध्यान में रखकर मंगलवार से ही ऑनलाइन केजरीवाल बनाम जगदीश मुखी के जंग छेड़ दी। इसमें हजारों आप समर्थकों ने केजरीवाल को इमानदार और जगदीश मुखी को भ्रष्ट बताया।
आप का यह पूरा आंदोलन ठीक उसी प्रकार से है, जैसे भाजपा ने लोकसभा चुनावों को नरेंद्र मोदी-राहुल गांधी बना दिया था। जबकि राहुल कांग्रेस के पीएम पद के उम्मीदवार नहीं थे। इसकी भनक भाजपा को लगते ही पार्टी अध्यख तिलमिला उठे और उन्होंने तत्काल आप पर करारा प्रहार किया।
सतीश उपाध्याय ने कहा है कि आम आदमी पार्टी कौन होती है भाजपा का सीएम उम्मीदवार तय करने वाली। उन्होंने कहा कि भाजपा अपने फैसले करना जानती है, बेहतर होगा कि आप अपने पर ध्यान दे।
'भाजपा में फूट डालना चाहते हैं केजरीवाल'
जगदीश मुखी को भाजपा का सीएम उम्मीदवार बताने के बाद आप पर पार्टी ने करारा हमला बोला। भाजपा के मुताबिक केजरीवाल भाजपा में फूट के बीज बोना चाहते हैं। ताकि वो सीएम की गद्दी तक पहुंच सकें। हालांकि इन आरोपों को खारिज करते हुए केजरीवाल ने कहा कि वह 49 दिन की सरकार से इस्तीफा देने के बाद से चुनाव की तैयारी कर रहे हैं।
केजरीवाल के मुताबिक इस्तीफा के बाद पार्टी ने स्थानीय स्तर पर काफी काम किया है। जिससे पार्टी का जनाधार काफी मजबूत हो गया है। उन्होंने कहा कि दिल्ली चुनाव के हालात लोकसभा चुनावों से इतर होते हैं। यहां जीत हासिल करने के लिए किसी लहर के बजाय जमीनी हकीकत से जुड़ना पड़ता है, जो भाजपा ने नहीं किया है।
वहीं, मुखी ने केजरीवाल पर गंभीर आरोप लगाते हुए एक चौंकाने वाला खुलासे किए हैं। उनके मुताबिक इस बार केजरीवाल अपनी विधानसभा नई दिल्ली से चुनाव नहीं लड़ेंगे। केजरीवाल इस बार पश्चिमी दिल्ली की किसी सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। ऐसा इसलिए कि उन्होंने अपनी विधानसभा में कोई काम नहीं कराया है, इसलिए चुनाव लड़ने पर उन्हें हार का डर सता रहा है।
उधर, केजरीवाल की छवि अब तक विपक्षी पार्टी के सबसे मजबूत उम्मीदवार के खिलाफ चुनाव लड़ने की रही है। पिछले साल उन्होंने दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित और पिछले लोकसभा चुनाव में उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ा था।