छोटे कारीगरों की आजीविका पर असर, काम भी कम मिल रहा
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। मध्य एशिया में जारी संघर्ष के कारण कच्चे माल की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिससे कीमतों में तेज उछाल देखने को मिल रहा है। आयात-निर्यात महंगा होने से व्यापारियों की लागत बढ़ गई है और बाजार में अस्थिरता का माहौल है। पुरानी दिल्ली के प्रमुख थोक बाजार चावड़ी बाजार, लालकुआं, अजमेरी गेट, गली पीपल महादेव और सीताराम बाजार आर्थिक दबाव से गुजर रहे हैं। यहां बांस, स्टील, एल्युमीनियम, आयरन, मशीन पार्ट्स, टूल्स, औद्योगिक उपकरण और सैनिटरी सामान का बड़ा कारोबार होता है, जहां देशभर से व्यापारी खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। दिल्ली स्टील टूल्स एंड हार्डवेयर ट्रेडर्स एसोसिएशन के पदाधिकारियों के अनुसार, स्टील और लोहे की कीमतों में अचानक वृद्धि ने कारोबारियों का बजट बिगाड़ दिया है। जिस दर पर पहले माल बेचा गया, उसी कीमत पर अब नया स्टॉक खरीदना संभव नहीं रह गया है। इससे बाजार में नकदी का प्रवाह भी प्रभावित हुआ है और व्यापारियों की पूंजी पर संकट गहरा गया है।
छोटे कारीगरों पर असर : इस कारोबार से जुड़े हजारों छोटे कारीगर और मैकेनिक सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं। कच्चे माल की बढ़ती कीमत और काम में कमी के कारण उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ा है। निर्माण और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कार्य धीमे पड़ते जा रहे हैं, जिससे रोजगार के अवसर भी घट रहे हैं। व्यापारियों ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। व्यापारियों के अनुसार, कच्चे माल की कीमतों को नियंत्रित करने के लिए ठोस नीति बनाई जाए। साथ ही, आयात शुल्क और जीएसटी में अस्थायी राहत दी जाए ताकि छोटे व्यापारियों को राहत मिल सके।
उत्पादन ठप, बाजार में कमी : युद्ध के कारण राजधानी में स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कई छोटी फैक्ट्रियां बंद हो चुकी हैं, जबकि बड़े उद्योगों का उत्पादन भी प्रभावित हुआ है। पीतल स्क्रैप की कीमत कुछ ही महीनों में 520 रुपये प्रति किलो से बढ़कर करीब 740 रुपये तक पहुंच गई है। वहीं, पीवीसी उत्पादों के दाम में 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है। बाजार में ग्राहकों की आवाजाही कम हो गई है और बाहरी व्यापारियों ने भी खरीदारी सीमित कर दी है। ऐसे में व्यापारी अनिश्चित भविष्य को लेकर चिंतित हैं और हालात सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं।