सुनंदा पुष्कर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करते वक्त मौत को प्राकृतिक बताने के लिए एम्स के निदेशक की ओर से दबाव बनाया जा रहा था।
दबाव में न आने की वजह से पिछली यूपीए सरकार और एम्स निदेशक की ओर से उन्हें लगातार परेशान किया जा रहा है। अब इस मामले में एम्स फोरेंसिक विभाग के प्रमुख और सुनंदा के शव का पोस्टमार्टम करने वाले मेडिकल टीम में शामिल डॉ. आदर्श ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. जेपी नड्डा को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है।
साथ ही डॉ. गुप्ता को ही एचओडी के पद पर बनाए रखने का आग्रह किया है। वहीं, इस पूरे मामले में एम्स-प्रशासन की ओर से बयान जारी कर कहा गया है कि सभी आरोप गलत हैं और डॉ. भारद्वाज को विभागाध्यक्ष बनाने की तैयारी की वजह से इस तरह के निराधार आरोप लगाए जा रहे हैं।
एम्स के फोरेंसिक विभागाध्यक्ष डॉ. सुधीर गुप्ता ने 28 मई को नड्डा को पत्र लिख कर कहा है कि इस पूरे मामले में प्रताड़ित किया जा रहा है। सुनंदा की मौत को प्राकृतिक बनाने के लिए उन पर दबाव था लेकिन उन्होंने सच्चाई का साथ दिया और इस एम्स निदेशक डॉ. एमसी मिश्रा की बात नहीं मानी।
यूपीए सरकार पर भी गंभीर आरोप
इसलिए पिछले एक वर्ष से उन्हें परेशान किया जा रहा है। एम्स-प्रशासन फोरेंसिक विभाग के साथ सहयोग नहीं कर रहा है जिसकी वजह से काम में दिक्कतें आ रही हैं। उन्हें गलत तरीके से एचओडी के पद से हटाने की तैयारी की जा रही है।
उधर, डॉ. आदर्श कुमार ने भी डॉ. गुप्ता के समर्थन में स्वास्थ्य मंत्री 29 मई को पत्र लिखा। डॉ. आदर्श ने भी सुनंदा की मौत को प्राकृतिक बताने का दबाव बनाने की बात कही।
एम्स प्रशासन ने आरोप खारिज किए-
एम्स-प्रशासन ने सफाई देते हुए कहा है कि सारे आरोप गलत हैं। वरिष्ठता के आधार पर ही डॉ. डीएन भारद्वाज को फोरेंसिक विभाग का विभागाध्यक्ष बनाने की तैयारी की गई और इसकी सूचना दिल्ली उच्च न्यायालय में दी गई है क्योंकि यह मामला अदालत में लंबित है।
एम्स प्रवक्ता डॉ. अमित गुप्ता ने कहा कि दरअसल 1 अगस्त-2012 को डॉ. भारद्वाज को फोरेंसिक विभाग का एचओडी बनाया गया था और करीब एक वर्ष तक इस पद पर रहने के बाद पारिवारिक कारणों से उन्होंने एचओडी के पद पर कार्य करने से असमर्थता जताई थी। इसके बाद डॉ. गुप्ता को एचओडी बनाया गया था।
एम्स ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका
सुनंदा पुष्कर के शव की जांच मामले में अव्यावसायिक काम करने से मना करने पर भेदभाव का आरोप लगाने वाले फोरेंसिक विभाग प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं।
एम्स ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर उनको हटाकर डॉ. डीएन भारद्वाज की नियुक्ति करने की अनुमति मांगी है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ने हाईकोर्ट को बताया कि वह सुधीर गुप्ता की अपेक्षा अपने फोरेंसिक मेडिसिन और विज्ञान विभाग के नए प्रमुख के रूप में डॉ. डीएन भारद्वाज को रखना चाहते हैं।
एम्स ने यह इजाजत हाईकोर्ट के उस फैसले के ध्यानार्थ मांगी है जिसमें सुधीर को विभाग से हटाने से पूर्व अदालत की इजाजत लेने का निर्देश दिया गया था। हाईकोर्ट में एम्स के आवेदन पर 23 जुलाई को सुनवाई होगी।
सुधीर का आरोप है कि उन्होंने सनसनीखेज सुनंदा पुष्कर की कथित हत्या मामले में बनी बनाई रिपोर्ट देने से इनकार कर दिया था इसी कारण उसे बदला जा रहा है। उन्होंने एम्स प्रशासन पर बदनीयती का आरोप लगाया है।