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फिरोज खान ही नहीं उनके पूरे खानदान ने पढ़ी है संस्कृत, पिता करते हैं कीर्तन, बुआ का नाम है 'लक्ष्मी'

Thu, 21 Nov 2019 08:29 PM IST
Prachi Priyam न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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फिरोज खान - फोटो : सोशल मीडिया
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आज 14वां दिन है जब बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के संस्कृत धर्म ज्ञान विभाग की कक्षा में पढ़ाई करने के लिए एक भी विद्यार्थी नहीं पहुंचा। धर्म ज्ञान विभाग के विद्यार्थी पिछले 14 दिनों से एक मुस्लिम प्रोफेसर की नियुक्ति को लेकर विरोध पर बैठे हुए हैं। छात्रों का कहना है कि वो किसी गैर ब्राह्मण से संस्कृत भाषा तो पढ़ सकते हैं, लेकिन धर्म ज्ञान नहीं। 

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दूसरी ओर इस विभाग के लिए नियुक्त प्रोफेसर फिरोज खान छात्रों के विरोध से दुखी होते हुए कहते हैं कि मैंने जीवन भर संस्कृत की पढ़ाई की, लेकिन पहली बार महसूस हुआ कि मैं मुस्लिम हूं। फिरोज खान की नियुक्ति पर छात्रों के विरोध से उनके पिता भी आहत हुए हैं। 

फिरोज खान कौन हैं, उनके पिता क्या करते हैं और उनके घर का रहन-सहन कैसा है, यह जानने के बाद उनकी नियुक्ति का विरोध करने वाले कई लोगों के मूंह पर ताला लग गया है। आपको बता रहे हैं प्रोफेसर फिरोज खान और उनके परिवार के बारे में सबकुछ।

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कौन हैं फिरोज खान?

Firoz khan with Ashok Gehlot - फोटो : BBC
राजस्थान की राजधानी जयपुर से 35 किलोमीटर दूर स्थित बागरू गांव के रहने वाले फिरोज खान कक्षा दो से संस्कृत पढ़ रहे हैं। उन्होंने संस्कृत में शास्त्री (स्नातक), आचार्य (स्नातकोत्तर), शिक्षाशास्त्र (बीए) की पढ़ाई की है। इसके बाद उन्होंने जयपुर के राष्ट्रीय संस्कृत शिक्षा संस्थान से एमए और पीएचडी की उपाधी हासिल की। 

साल 2018 में फिरोज खान को 14 अगस्त को मनाए जाने वाले संस्कृत दिवस पर राज्य स्तरीय संस्कृत युवा प्रतिभा सम्मान समारोह में भी सम्मानित किया जा चुका है। 

फिरोज खान कहते हैं कि मैं जितना संस्कृत जानता हूं, उतना तो मुझे कुरान का भी ज्ञान नहीं हैं। इसके बावजूद कभी किसी पड़ोसी, दोस्त या मौलवी ने इसके विरोध नहीं किया, लेकिन...

कौन हैं फिरोज खान के पिता?

रमजान खान (फिरोज के पिता) - फोटो : एएनआई
बागरू के मंदिरों में जाकर भजन-कीर्तन और आरती कर अपना घर चलाने वाले रमजान खान फिरोज के पिता हैं। आसपास के लोग उन्हें मुन्ना मास्टर के नाम से जानते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि रमजान खान ने खुद भी संस्कृत विषय में ही पढ़ाई की है। उन्होंने संस्कृत में शास्त्री यानी स्नातक तक की शिक्षा ली है। 

इससे लगाव के कारण ही उन्होंने बचपन से कभी फिरोज को मदरसा भी नहीं भेजा। उन्होंने शुरू से ही फिरोज को संस्कृत की शिक्षा दी है। रमजान खान को बागरू में आप आए दिन किसी मंदिर में हारमोनियम बजाकर आरती गाते या भजन-किर्तन मंडली के साथ गाते-झूमते देख सकते हैं। 

वो कहते हैं कि मैंने जिंदगी भर संस्कृत से मोहब्बत की है। बेटे को भी इसी भाषा में पढ़ाया, लेकिन अब दिल कचोट रहा है कि इस मुकाम पर पहुंचने के बाद, केवल कुछ लोगों के विरोध के कारण मेरे बेटे का करियर दांव पर लग गया है।

बीएचयू में चल रहे विरोध पर अपने आंसुओं को घोंटते हुए रमजान ने कहा कि फिरोज को संस्कृत पढ़ाने के बजाय मुर्गी बेचने के काम में लगा देता तो बेहतर होता। तब लोगों को इतनी आपत्ती नहीं होती!
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कैसा है फिरोज खान के घर का रहन-सहन?

यह जानकर आप हैरान रह जाएंगे कि जिस फिरोज खान के संस्कृत पढ़ाने को लेकर बीएचयू में इतना विवाद छिड़ा है, उनका संस्कृत के साथ पीढ़ियों का नाता है। फिरोज के दादा ने भी संस्कृत में ही पढ़ाई की थी। उनके पिता तीन भाई हैं, तीनों ने संस्कृत में पढ़ाई की। 

फिरोज की एक बुआ हैं। उनका जन्म दीपावली के दिन हुआ था इसलिए दादा ने उनका नाम 'लक्ष्मी' रखा। उनके पिता एक विशाल गोशाला में काम करते हैं और वहां की गायों की सेवा करते हैं। 

ऐसे परिवार और ऐसी पृष्ठभूमि से आने वाले फिरोज खान की नियुक्ति पर प्रतिष्ठित बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के छात्र ढोल-नगाड़ों के साथ विरोध पर बैठे हैं...।
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