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घुटता दम: एनसीआर के 55 हजार वर्ग किमी पर छाया 'उजला अंधेरा', गाजियाबाद देश का सबसे प्रदूषित शहर

Sun, 07 Nov 2021 06:20 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

सीपीसीबी की 138 शहरों की सूची में गाजियाबाद की स्थिति सबसे गंभीर रही। यहां औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 466 दर्ज हुई। इस बीच शहर के कई इलाकों का प्रदूषण स्तर 500-600 से बीच रहा।
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दिल्ली-एनसीआर में छाया प्रदूषण का सफेद धुंआ - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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दिवाली के बाद दिल्ली समेत पूरे एनसीआर के करीब 55 हजार वर्ग किमी पर 'उजला अंधेरा' सफेद धुंआ छाया रहा। उत्तर प्रदेश के मेरठ से लेकर हरियाणा के जींद तक की हवा 'गंभीर' स्तर तक प्रदूषित हो गई है। गाजियाबाद देश का सबसे प्रदूषित शहर रहा। वहीं, नोएडा व गुरुग्राम दूसरे व तीसरे सबसे ज्यादा प्रदूषित शहर बने। प्रदूषण पर नजर रखने वाली एजेसियों का कहना है कि रविवार को भी राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। आज सवेरे भी वायु गुणवत्ता का स्तर 436 दर्ज किया गया जो कि 'गंभीर' श्रेणी में आता है। 

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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ो के मुताबिक, गाजियाबाद का 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 466 दर्ज किया गया। इस बीच शहर के कई इलाकों का प्रदूषण स्तर 500-600 से बीच रहा। दूसरी तरह 461 के सूचकांक के साथ नोएडा दूसरा सबसे प्रदूषित शहर बना। वहीं, गुरूग्राम का वायु गुणवत्ता 456 रिकार्ड किया गया। दूसरी तरफ दिल्ली का सूचकांक 437 दर्ज किया गया। हवा की चाल बढ़ने से अगले सप्ताह दिल्ली-एनसीआर की प्रदूषण छंट सकता है।

सीपीसीबी विशेषज्ञों का कहना है कि हालात आपातकाल के नजदीक जा रहे हैं। सोमवार तक इसमें बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं दिख रही है। हवा की चाल तेज होने से प्रदूषण स्तर में कमी आ सकती है। बाजवूद इसके प्रदूषण का स्तर बेहतर खराब बना रहेगा। 
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पराली की बढ़ी हिस्सेदारी, हवा की चाल ने संभाला प्रदूषण का स्तर
सफर के मुताबिक, बीते 24 घंटे में पड़ोसी राज्यों में पराली जलने की पांच हजार से अधिक घटनाएं दर्ज हुई है। इस सीजन की यह सबसे अधिक पराली जलाने की घटना है। दिल्ली-एनसीआर में चलने वाली हवाओं का रूख भी उत्तर पश्चिम बना हुआ है। इससे दिल्ली के प्रदूषण में पराली के धुएं की हिस्सा 41 फीसदी हो गया। शुक्रवार को यह आंकड़ा 36 फीसदी था। राहत की बात यह है कि हवा की रफ्तार तेज होने के कारण प्रदूषण फैल गया है। इससे शनिवार को दिल्ली समेत अन्य शहरों के औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक में मामूली कमी दर्ज हुई है। 

सफर का कहना है कि ऊपरी सतह पर चलने वाली हवाओं की रफ्तार 25 से 35 किलोमीटर प्रतिघंटा है। इससे दिल्ली की हवा में प्रदूषण स्थिर नहीं हो सके। प्रदूषकों के दूर-दूर तक फैलने में मदद मिली। यदि हवा तेज रफ्तार से नहीं चलती तो आशंका दिल्ली की वायु गुणवत्ता के खतरनाक स्तर में पहुंचने की भी थी।

एनसीआर के शहरों में बदतर बने हुए हैं हालात
दिवाली के दो दिन गुजरने के बाद भी एनसीआर के शहरों की हालत गंभीर बनी हुई है। दिल्ली से नजदीकी शहरों में शामिल बागपत, बुलंदशहर, चरखी दादरी, हापुड़, व बहादुरगढ़ का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 430 से 445 तक दर्ज किया जा रहा है। एनसीआर के 55 हजार वर्ग किलोमीटर में स्थित शहरों में बीते दो दिनों से प्रदूषण की चादर छाई हुई है। शनिवार को भी दिनभर प्रदूषण के कारण दृश्यता का स्तर कम रहा। साथ ही लोगों को स्वास्थ्य संबंधी भी परेशानी बनी रही। दूसरी तरफ जिन शहरों की वायु की गुणवत्ता इनसे थोड़ा बेहतर है, वहां का सूचकांक भी बेहद खराब और गंभीर की सीमा के नजदीक ही बना हुआ है।

दिल्ली-एनसीआर के आंकड़े
  छह नवंबर पांच नवंबर
दिल्ली 437 462
फरीदाबाद 449 469
गाजियाबाद 466   470
ग्रेटर नोएडा 414 464
गुरुग्राम 456 472
नोएडा 461 475

  
एनसीआर के अन्य शहर
बागपत 445
बल्लभगढ़ 431
बुलंदशहर 433
चरखी दादरी 408
हापुड़ 445
हिसार 422
जींद 422
मेरठ 438
मुरादाबाद 414
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