उत्तर-पूर्वी दिल्ली के भजनपुरा इलाके में हुई हिंसा के बाद तबाही के निशान भयावह मंजर को बयां कर रहे हैं। इसी में शामिल है चांद पीर बाबा की वह मजार, जो कभी हिंदू-मुस्लिमों के आपसी प्रेम व सौहार्द को बयां करती थी।
भजनपुरा चौक पर स्थित इस मजार की चौखट पर कभी दोनों समुदायों के लोग एक साथ पहुंचकर माथा टेक अमन व चैन की दुआ किया करते थे, लेकिन दंगाइयों ने एकता की प्रतीक इस मजार को भी आग के हवाले कर दिया।
स्थानीय लोगों ने बताया कि चौक पर स्थित यह मजार काफी पुरानी है। पुरानी होने के साथ-साथ यह हिंदू व मुस्लिम समुदाय के लोगों की आस्था का केंद्र भी थी। यही कारण था कि प्रत्येक बृहस्पतिवार को इस मजार पर दोनों समुदायों के लोग चादर चढ़ाने के लिए आसपास के इलाकों से पहुंच परिवार की खुशहाली के साथ-साथ अमन व चैन की दुआ करते थे।
यही नहीं दिवाली व होली के समय भी हिंदू समुदाय के लोग यहां अगरबत्ती जलाने के लिए आते थे। दोनों समुदायों के लोग एक साथ यहां माथा टेकते थे तो आपसी सौहार्द की एक नई परिभाषा यहां झलकती थी, लेकिन हिंसा के बाद यहां का नजारा कुछ और है।
मजार के चारों ओर तबाही का मंजर दंगाइयों के करतूत की गवाही दे रहा है। स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि वक्त की मरहम के साथ इस मजार की हालत में भी सुधार होगा व आपसी भाईचारे की मिसाल लोगों के सामने होगी।
मस्जिद व मदरसे को भी पहुंचाई क्षति
हिंसा के दौरान अशोक नगर की मस्जिद के साथ-साथ बृजपुरी की पुलिया के पास उपद्रवियों ने एक ही परिसर में स्थित मस्जिद व मदरसे को भी आग के हवाले कर दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिन लोगों ने घटना को अंजाम दिया है, वे लोग बाहर के थे, इससे पहले उन्हें कभी यहां नहीं देखा गया।