द्वारका स्थित फास्ट ट्रैक कोर्ट के न्यायाधीश विरेंद्र भट्ट ने अपने फैसले में कहा कि सभी साक्ष्यों से स्पष्ट है कि महिला और उसके पति का वर्ष 2007 में तलाक हो गया था।
पति ने उसे दी जाने वाली राशि बंद कर दी। महिला ने अपने वकील से राय ली और उसकी सलाह पर दुष्कर्म और जबरन गर्भपात कराने का आरोप लगा दिया। अदालत ने कहा कि जिरह के दौरान महिला एक बार भी अपने बयानों पर कायम नहीं रही।
अदालत ने कहा कि महिला ने मजिस्ट्रेट के समक्ष पहले बयानों में कहा कि उसकी शिकायत मात्र पति द्वारा उसे प्रदान की जाने वाली राशि रोकने व उसके फोन न सुनने को लेकर है।
इसके बाद महिला ने अपने वकील से मुलाकात की और उसे इस संबंध में बताया। वकील ने पूर्व पति पर रेप का आरोप लगाने की सलाह दी और महिला ने आरोप लगा दिया।