अटाली गांव का दंगा रोकने में नाकाम रही पुलिस अब लाठी के बल पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाना चाहती है, ताकि पीड़ितों का दर्द और सच जनता के सामने न पहुंचे।
मंगलवार को इस मामले की कवरेज करने पहुंचे ‘अमर उजाला’ संवाददाता के साथ एक एएसआई ने अभद्रता की और मोबाइल छीन कर सभी फोटो डिलीट कर दिए। संवाददाता ने इसका विरोध किया तो एएसआई ने सभी चीजें जब्त कर गिरफ्तार करने की धमकी भी दे डाली।
एससीपी मुजेसर को मामले से अवगत कराया तो उन्होंने भी मातहत का पक्ष लेते हुए संवाददाता को वहां चुपचाप चले जाने वरना बंद करने धमकी दी। पुलिस आयुक्त सुभाष यादव ने भी पुलिस वालों को सही ठहराते हुए कहा कि उन्होंने तो गांव में किसी भी बाहरी के घुसने पर रोक लगा रखी है।
पुलिस को दी गई थी सूचना
कानून व्यवस्था के लिए यह सब करना जॉब का हिस्सा है। मालूम हो कि अटाली हिंसा के पहले ही 22 मई को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष नसीम अहमद ने पुलिस आयुक्त सुभाष यादव को फोन पर गांव में तनाव बढ़ने के चलते कभी भी विवाद होने की आशंका जताई थी।
पुलिस आयुक्त ने उनकी चेतावनी को संज्ञान में नहीं लिया और 25 मई को दंगा हो गया। दंगे को काबू करने में भी पुलिस नाकाम साबित हुई थी। छांयसा थाना प्रभारी बाबूलाल सूचना के सवा घंटे बाद मौके पर पहुंचे थे, तब तक दंगाइयों ने कई घरों को जला डाला था।
अल्पसंख्यक आयोग ने भी पुलिस की नाकामी की रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्रालय और राज्य सरकार को भेज दी। इसलिए अपनी नाकामी छिपाने के लिए पुलिस ने अब गांव में मीडिया के प्र्रवेश पर प्रतिबंध लगा दिया है।
यदि निगेटिव खबर बनानी है तो वापस चले जाओ..
गांव की सीमा पर एसीपी तिगांव विष्णुदयाल तैनात हैं। उनका सख्त आदेश है कि गांव वालों को छोड़कर बाहर का कोई भी व्यक्ति प्रवेश नहीं करे। मातहत उनके आदेश का पालन करने में लोगों से अभद्रता तक कर रहे हैं।
मंगलवार को अमर उजाला संवाददाता गांव में शांति व्यवस्था कायम करने के लिए किए जा रहे प्रयास और पीड़ितों के दर्द पर स्टोरी कवरेज करने पहुंचे। सीमा पर बैठे एसीपी मुजेसर ने साफ कहा कि यदि निगेटिव स्टोरी बनानी है तो वापस चले जाओ।
संवाददाता ने उद्देश्य बताया कि शांति बहाली के प्रयास पर स्टोरी करनी है तो एसीपी ने उसे इजाजत दी। गांव में संवाददाता ने अल्पसंख्यक और बहुसंख्यक वर्ग के गणमान्य लोगों से बातचीत की और उनके फोटो खीचें।
ऐसे लौटेगी अटाली में शांति?
इसके अलावा गांव के कुछ और फोटो लिए। कवरेज के बाद वापस लौट रहे संवाददाता को एक एएसआई ने रोक लिया। उसने ऐसे पूछताछ शुरू की जैसे किसी अपराधी से बात की जाती है। संवाददाता का मोबाइल फोन छीनकर सभी फोटो डिलीट कर दिए।
उधर, इस बारे में जब एसडीएम डॉ. प्रियंका सोनी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि गांव में मीडिया के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाए जाने की जानकारी उन्हें नहीं है। सिटी प्रेस क्लब ने इस घटना की निंदा की है।
सुप्रीम कोर्ट के एक वकील के मुताबिक तने बड़े मामले को संभालने में नाकाम रही पुलिस अब मीडिया को कुचलने का प्रयास कर रही है, जो निंदनीय है। ऐसा करना गैरकानूनी है। यदि पुलिस ने कोई प्रतिबंध लगाया है तो उसकी सार्वजनिक सूचना दे। बताए कि क्यों रोक लगाई गई?