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इनकी तरह आपको भी ना छोड़नी पड़े राजधानी

Wed, 10 Jun 2015 06:48 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
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पिछले हफ्ते न्यूयॉर्क टाइम्स के पत्रकार गार्डिनर हैरिस का नाम एक बहस में खूब उछाला गया। बहस इस विषय पर थी कि क्या दिल्ली बच्चों के लिए सुरक्षित है या नहीं। क्योंकि हैरिस ने अपनी बच्चे के स्वास्थ्य के डर से राजधानी दिल्ली को छोड़ दिया।
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हैरिस न्यूयॉर्क टाइम्स के दक्षिण एशिया के सवांददाता थे, जो दिल्ली में रह रहे थे। अपने लेख होल्डिंग योर बरिथ इन इंडिया में उन्होंने लिखा कि दिल्ली के प्रदुषण के चलते उनके बेटे के फेफड़ों की कार्यक्षमता 50 फीसदी कम हो गई है।

इसमें कोई दोराय नहीं थी कि लोगों को हैरिस की ये बात हैरतंगेज लगी। लेकिन वास्तव में हैरिस की दिल्ली के प्रदुषण के बारे में सोच सही थी। एक अन्य समाचार पत्र के सर्वे में ये बात सामने भी आयी है।
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एक सच्चाई ये भी है

इस दैनिक समाचार पत्र ने 8 से 14 साल के अलग-अलग सामाजिक-आर्थिक पृष्ठभूमि वाले 5 बच्चों का गुडगांव, मोहाली और शालिमार बाग के फोर्टिस हॉस्पिटल में अस्थमा और फेफेड़े की कार्यक्षमता से संबंधित टेस्ट करवाए।

इस टेस्ट के नतीजे चौकाने वाले और भयानक नजर आए। चार में से तीन बच्चो के फेफड़ें जांच में कमजोर पाए गए। ऐसी एलर्जी आमतौर पर धूम्रपान करने वाले लोगों के फेफड़ों में दखने को मिलती है।

जबकि बच्चों के माता-पिता को ये जानकारी ही नहीं है कि उनके बच्चों के फेफड़ों की हालत गंभीर है। इनमें से दो बच्चों के फेफड़ों की कार्यक्षमता 80 फीसदी से भी नीचे के स्तर की है।
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यहां बेहतर हैं हालात

जबकि इनमें से एक 10 साल के बच्चे के फेफड़े सूक्ष्म वायू प्रतिरोधी सी पीड़ित है। जोकि एक फेफड़े स्थायी रूप से फेफड़े खराब होने का लक्षण है।

हालांकि इनमे से एक बच्चे के फेफड़े आश्चर्यजनक रूप से कम प्रदूषित है। इसके अलावा एक अन्य सर्व के आंकड़ें भी कमोबेश ऐसे ही हालात बयां करते हैं।

अन्य शहरों के मुकाबले दिल्ली के बच्चे ज्यादा प्रभावित नजर आते हैं।
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