फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मातृ दिवस: आठ वर्षों से तस्वीरों में ढूंढती रही मां की ममता, बेटी को सामने देख फूट-फूटकर रो पड़ी

Sat, 10 May 2025 08:21 AM IST
विजय पुंडीर राम नरेश, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

रेनू वर्षों से एक सरकारी विद्यालय में शिक्षक के तौर पर सेवा दे रही हैं। कक्षा में बच्चों को शिक्षा देना उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि एक पुकार है एक मिशन, जिसे उन्होंने दिल से अपनाया है। उनके जीवन का एक और महत्वपूर्ण पहलू है उनका मातृत्व।
विज्ञापन
मदर्स डे - फोटो : freepik
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

एक मां जो वर्षों से अपनी बेटी से दूर है, उसकी तस्वीरों में सुकून ढूंढती है और आखिरकार जब बेटी गले लगती है तो वह क्षण बरसों की दूरी को मिटा देता है। दूसरी ओर एक शिक्षिका मां, जो समाज को शिक्षा देती हैं, अपने बच्चे की यादों को सहेजती हैं सोशल मीडिया की तस्वीरें, फोन की बातचीत ही उनका संबल बन जाती हैं। 

विज्ञापन


वहीं तीसरी मां रेनू, जिनका बेटा सेना में देश की सेवा कर रहा है, उसके दूर होने का दर्द महसूस करती हैं, लेकिन गर्व भी करती हैं कि उनका बेटा भारत की सुरक्षा में लगा है। इन दौरान जब बेटा घर आता है तो वो क्षण उनके लिए पूरे साल की सबसे बड़ी सौगात बन जाते हैं। इन तीनों कहानियों में मां  का रूप अलग है, लेकिन भावनाएं एक जैसी हैं अटूट प्रेम, त्याग, और उम्मीद। यही मातृत्व की सच्ची शक्ति है।

बेटी के बिना त्योहार भी रहता है सूना
वह अपनी बेटी से करीब आठ वर्षों से अलग हैं। जब बेटी विदेश गई तो गर्व भी था और एक अजीब-सा खालीपन भी। दिनभर के काम में वह खुद को उलझाए रखतीं, मगर रात की खामोशी में बेटी की हंसी बहुत याद आती। बेटी साल में एक-दो बार आती, होली और दिवाली पर, मगर कभी-कभी छुट्टियां ना मिलने पर वह भी छूट जातीं। मां चुपचाप उसकी तस्वीरों को देखतीं और मुस्करा लेतीं। हाल ही में बेटी ने उन्हें विदेश बुलाया, जहां वह वर्षों से रह रही थी। जैसे ही मां ने बेटी को गले लगाया, बरसों की दूरी एक पल में मिट गई। वह सफर सिर्फ एक देश का नहीं था, बल्कि भावनाओं का पुनर्मिलन था। मां को महसूस हुआ कि उनकी बेटी अब बेहद संवेदनशील और समझदार हो चुकी है। 
विज्ञापन


तस्वीर देख करती हैं लम्हों को याद
वह वर्षों से एक सरकारी विद्यालय में शिक्षक के तौर पर सेवा दे रही हैं। कक्षा में बच्चों को शिक्षा देना उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि एक पुकार है एक मिशन, जिसे उन्होंने दिल से अपनाया है। उनके जीवन का एक और महत्वपूर्ण पहलू है उनका मातृत्व। उनका एक बच्चा है जो सैकड़ों किलोमीटर दूर अपने-अपने जीवन की राह पर अग्रसर हैं। तीज-त्योहार पर जब कभी घर की रौनक लौटती तो वो पल जैसे पूरे साल की थकान को धो देते हैं। बाकी समय, उनके बच्चों की यादें ही उनकी साथी बन जाती हैं कभी सोशल मीडिया पर आई पुरानी तस्वीर, तो कभी फोन पर मीठे शब्द। इन छोटी-छोटी चीजों में भी मां का दिल भर आता है। 


गर्व से बोली, बेटे की वजह से चैन से सो पाता है देश
इस तनावपूर्ण माहौल में बेटे का घर पर न होना दिन में कई बार मायूसी की ओर धकेलता है। फिर एक अंदरूनी आवाज मुझे सहारा देती है कि आज इन्हीं जांबाज देशभक्तों और सैनिकों की वजह से मेरा परिवार और पूरा भारत चैन की नींद सोता है। ऐसी मां जिनके बेटे सेना में सेवाएं दे रहे हैं उनके लिए मातृ दिवस की असली खुशी यह है कि जब उनका बेटा-बेटी और पति उनके साथ बैठकर खाना खाते हैं और कई तरह की बातें करते हैं। उनके महीने भर की खुशी को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता है। मेरा बेटा साल में दो बार ही मेरे पास आता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें