शरीर में झुनझुनी, कुछ भी काम करने पर थकान के साथ ही इस्केमिक अटैक से जूझ रही छात्रा को डाॅक्टरों ने नया जीवन दिया है। 22 वर्षीय एमबीबीएस की छात्रा जन्मजात और दुर्लभ बीमारी फुफ्फुसीय धमनी शिरापरक विकृति (पीएवीएम) से जूझ रही थी। समस्या ज्यादा बढ़ने पर उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां विशेष एम्बोलिजेशन प्रक्रिया के जरिये उसका सफल उपचार किया गया। अब उसकी हालत ठीक है।
छात्रा को बीते चार साल से सेंट्रल सायनोसिस, कुछ भी काम करने पर थकान का अनुभव समेत अन्य तरह की समस्या हो रही थी। उसे दिन में कई बार इस्केमिक अटैक आ रहे थे। जांच में पता चला कि उसके शरीर को सही तरीके से ऑक्सीजन नहीं मिल रही है।
इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के इंटरवेंशनल न्यूरो रेडियोलॉजिस्ट डॉ. निश्चिंत जैन ने बताया कि विशेष एम्बोलिजेशन की प्रक्रिया के बाद छात्रा की सेहत में काफी तेजी से सुधार आया है। उसकी ऑक्सीजन संतृप्ति 96% तक बढ़ गई है। डॉ. जैन ने बताया कि जिन्हें सांस की तकलीफ, सायनोसिस, स्ट्रोक या मस्तिष्क फोड़े जैसी जटिलताएं हैं, उनमें सीने के सीटी स्कैन, ट्रांस थोरेसिक कंट्रास्ट इकोकार्डियोग्राफी या फिर फुफ्फुसीय एंजियोग्राफी के जरिये इसका पता लगाया जा सकता है।
लगभग 0.02% आबादी में होती है बीमारी, ऐसे समझें लक्षण
फुफ्फुसीय धमनी शिरापरक विकृतियां काफी दुर्लभ हैं। यह लगभग 0.02% आबादी में होती हैं। यह वंशानुगत हो सकती है। इसमें फेफड़ों की नसों और धमनियों के बीच गलत कनेक्शन बन जाता है। इसकी वजह से धमनी और शिरा सीधे जुड़ जाती हैं।
- डॉक्टरों के अनुसार, इस बीमारी के कारण खून सही से फिल्टर नहीं होता और शरीर को कम ऑक्सीजन मिलती है। इससे शरीर की कार्यशैली प्रभावित होती है और समय-समय पर अटैक आते हैं। किसी आघात या संक्रमण से भी यह बीमारी हो सकती है
यह मामला बहुत दुर्लभ है, क्योंकि स्ट्रोक एक न्यूरोलॉजिकल घटना है, जो इस छात्रा को फुफ्फुसीय धमनी शिरा विकृति (पीएवीएम) के कारण हुई। यह परेशानी धमनी और शिरा के बीच एक असामान्य संबंध है। ऐसे मामलों में समय पर जांच के साथ अनुभवी डॉक्टरों की टीम के जरिये उपचार से इलाज संभव है।
-डॉ. पी.एन. रेनजेन, न्यूरोलॉजी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार