उबर कैब रेप केस में आरोपी ने पुलिस पर कथित पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट में हेरफेर किया व झूठे साक्ष्य जुटाए। पीड़िता की शुरुआती मेडिकल जांच के मुताबिक उसके शरीर पर किसी चोट के निशान नहीं थे और इसीलिए डॉक्टर ने उसे कोई दवा नहीं दी थी। पुलिस ने करीब 12 घंटे बाद जब तीसरी बार पीड़िता का मेडिकल करवाया तो उसके शरीर पर डॉक्टर ने चोट के निशान दिखाए।
तीस हजारी स्थित अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कावेरी बावेजा के समक्ष शनिवार को बहस जारी रखते हुए बचाव अधिवक्ता धर्मेंद्र कुमार मिश्रा ने कहा शुरुआती जांच के मुताबिक पीड़िता के शरीर पर किसी तरह की चोट के निशान नहीं थे। आपातकालीन विभाग व महिला रोग विशेषज्ञ ने उसका परीक्षण किया लेकिन शरीर पर कहीं भी किसी चोट का जिक्र नहीं किया।
बचाव पक्ष ने अपनी दलील में कहा कि पीड़िता को पहली बार रात करीब 3.30 बजे अस्पताल ले जाया गया। वह वहां करीब दो घंटे रही और उसका दो डॉक्टरों ने परीक्षण किया। डॉक्टरों के मुताबिक पीड़िता के शरीर पर चोट का कोई निशान नहीं था। पुलिस जांच अधिकारी ने केस दर्ज करने के लिए सुबह 5.30 बजे जो सूचना थाने भेजी उसमें भी किसी चोट का जिक्र नहीं था।
पुलिस पर बचाव पक्ष ने लगाए हैं गंभीर आरोप
पुलिस पर झूठे साक्ष्य जुटाने का आरोप लगाते हुए बचाव पक्ष ने कहा कि पीड़िता का 12 घंटे बाद शाम साढ़े सात बजे मेडिकल करवाया गया। इसमें डॉक्टर ने पीड़िता के गले व प्राइवेट पार्ट्स में रेडनेस होने की बात कही।
इससे साफ है कि पुलिस ने एमएलसी में जुटे साक्ष्य जुटाए। बचाव पक्ष की दलीलों पर आपत्ति जताते हुए विशेष लोक अभियोजन अधिकारी अतुल श्रीवास्तव ने कहा कि बचाव पक्ष केवल केस की सुनवाई को लंबा खींचने की कोशिश कर रहा है।
बचाव पक्ष ने कहा कि जब शुरुआत में कोई चोट नहीं थी तो तीसरे एमएलसी में शरीर पर चोटें कहां से आ गईं।
पुलिस ने पीड़िता की एमएलसी के तथ्यों में किया हेरफेर
पुलिस ने पीड़िता के अंडर गारमेंट्स को भी सेक्सुअल किट में प्लांट करवाया क्योंकि जब डॉक्टर ने पीड़िता का मेडिकल किया तो उसमें केवल बाहरी कपड़ों का जिक्र है। इसके अलावा मालखाना के रजिस्टर में भी केवल बाहरी कपड़ों का ही जिक्र है।
वारदात में इस्तेमाल कार की पहचान को भी बचाव पक्ष ने कटघरे में खड़ा कर दिया। बचाव पक्ष ने कहा कि जिस कार में कथित वारदात हुई उसकी पहचान पुलिस साबित नहीं कर पाई।
पुलिस ने जिस कार का सीएफएल परीक्षण करवाया वह कार आरोपी की नहीं थी क्योंकि पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक आरोपी की कार थाने के मालखाने में थी और जिस कार का परीक्षण हुआ वह कार ऑपरेशन सेल के दफ्तर में थी। पुलिस के मुताबिक आरोपी की कार कभी भी थाने से निकालकर ऑपरेशन सेल के दफ्तर नहीं ले जाई गई।