जामिया यूनिवर्सिटी में हुई पुलिसिया कार्रवाई को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन अभी असंजस की स्थिति में है। पुलिस कार्रवाई का सच क्या है, इसकी तह तक पहुंचने का प्रयास होना चाहिए। मामले की न्यायिक जांच हो या हाई लेवल जांच हो, विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस बाबत केंद्र सरकार या गृह मंत्रालय को अधिकारिक तौर पर नहीं लिखा है।
सेंट्रल यूनिवर्सिटी की विजिटर कान्फ्रेंस के दौरान एग्जीक्यूटिव काउंसिल में यह प्रस्ताव पास किया गया था कि जामिया मामले की हाई लेवल जांच या न्यायिक जांच कराई जाई। खास बात है कि अभी तक जामिया विश्वविद्यालय प्रशासन ने केंद्र सरकार या केंद्रीय गृह मंत्रालय से लिखित में ऐसी कोई जांच कराने की मांग नहीं की है।गृह मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि हमारे पास अभी तक ऐसा कोई दस्तावेज नहीं पहुंचा है।
बता दें कि जामिया की घटना के बाद मीडिया में विपक्षी दलों और विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा जांच कराने की मांग की गई थी। मंगलवार को गृह मंत्रालय के सूत्रों ने कहा, ऐसा कोई लिखित आवेदन विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से हमें नहीं मिला है। दिल्ली पुलिस मामले की जांच कर रही है।
चाहे स्थानीय नेता हो या फिर कोई और, जिस किसी की संलिप्तता पाई जाएगी, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई होगी। पुलिस कई तरह से मामले की जांच में जुट गई है। मुखबिरों की मदद से यह पता लगाया जा रहा है कि प्रदर्शन को उग्र बनाने के पीछे किन लोगों का हाथ है।