दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालीवाल शनिवार को विवेक विहार सड़क हादसे में मारे गए युवक विनय के घर झिलमिल कॉलोनी उनकी मां और बहन से मिलने पहुंची।
विनय से प्रेरणा पाकर स्वाति ने भी अपनी आंखें दान करने की घोषणा की। मुलाकात के दौरान मां ने स्वाति को बताया कि 20 जुलाई की रात हादसे के बाद नौ मिनट तक विनय सड़क पर मदद के लिए तड़पता रहा।
लेकिन कोई आगे नहीं बढ़ा..फिर काहे की दिल्ली दिलवालों की? सिसकते हुए मां ने बताया कि काश! कोई हाथ तो आगे बढ़ा होता, मेरा इकलौता चिराग न बुझता। बेहद तकलीफों के साथ मैंने उसे पाला था।
दिल्लीवालों ने झोली खाली कर दी
वो साढ़े तीन साल का था, जब पिता का साया उठ गया। छोटी सी दुकान चलाकर बेटे और बेटी को पढ़ाया-लिखाया। बेटी तो विदा हो गई और बेटा दुनिया से रुखसत हो गया।
मेरी तो जीवनभर की पूंजी चली गई। दिल्लीवालों ने मेरी झोली खाली कर दी। रोते हुए बहन ने बताया कि शुक्रवार को बीबीए का रिजल्ट आया है, जिसमें उसे 75 फीसदी नंबर आए हैं।
मेरा भाई पढ़ाई में बेहद तेज था। रिजल्ट का इंतजार कर रहा था, ताकि अच्छी नौकरी मिल सके। वो अक्सर मां को दुकान पर देखकर कहता था, बस अब थोड़े दिनों की बात है, फिर घर में आराम से रहना। मेरी शादी के बड़े सपने देखे थे, लेकिन खुशी तो जैसे जीवन से उसके साथ ही चली गई।
कोई आगे बढता तो जिंदा होता विनय...
दूसरी ओर गुरुनानक देव आई सेंटर में शनिवार को विनय की दान की गई आंख दो मरीजों को ट्रांसप्लांट की गई। जाते-जाते उसने अपनी दो साल पुरानी इच्छा के तहत दो परिवारों कीअंधियारी जिंदगी में नई सुबह का उजाला भर दिया।
स्वाति ने विनय की मां से पूरी कहानी सुनने के बाद ट्वीट पर कहा कि इस हादसे ने फिर मुसीबत में मदद करने वाले कानून की जरूरत दर्शाई।
यदि कोई मदद के लिए आगे बढ़ता तो वो आज हम सबके बीच होता।