तकनीक क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही सीडी-डीवीडी पर्यावरण के लिए खतरा बन रहे हैं। इनकेकारण भूमि बंजर हो रही है और जीव-जंतु गंभीर रोगों की चपेट में आ रहे हैं।
पर्यावरण विशेषज्ञों की मानें तो सीडी-डीवीडी को गलने में 450 साल लगते हैं, ऐसे में यह पर्यावरण प्रदूषण के लिए बड़ी समस्या है।
सीडी-डीवीडी आजकल प्रमुखता से प्रचलन में है। इनमें से कुछ एक बार-जबकि कई को बार-बार प्रयोग कर फेंक दिया जाता है। पर्यावरण विशेषज्ञ डा. विवेकराज सिंह के अनुसार डीवीडी-सीडी का निर्माण पॉलीकार्बनिक प्लास्टिक से होता है।
इसके ऊपर सुपर प्योरटी एल्युमिनियम लेयर चढ़ाई जाती है। ऐसे में यह आइटम नानबायोडिग्रेबल हो जाता है और लंबे समय तक जमीन में पड़ा रहता है।
इसको डीकंपोज होने में 450 साल का वक्त लगता है। तब तक इनसे हवा में पार्टिकल निकलते रहते हैं। इसका आर्गेनिक मेटल पार्ट जमीन में मिलकर उसे बंजर बना देता है।
जबकि बायोलाजिकल बाड़ी में जाकर यह लीवर कैंसर को जन्म देता है। इससे ब्लड और यूरिन का प्रोफाइल चेंज हो जाता है, इससे आरबीसी-डब्ल्यूबीसी नष्ट होने लगते हैं।
यही कारण है कि जापान, इटली और अमेरिका में इसपर रोक लगा दी गई है। वहां पर बायोडिग्रेबल मैटेरियल से सीडी -डीवीडी बनाई जा रही हैं। वह थोड़ी महंगी जरूर होती हैं, लेकिन ईको-फ्रेंडली होने से नुकसान नहीं पहुंचाती।