नोएडा में 12 सितंबर 2014 में बिजनौर के उमरी गांव में विस्फोट के बाद भागे पांच आतंकी पिछले कुछ समय से कहीं नोएडा में तो नहीं छिपे थे। इस विस्फोट में घायल महिला हुस्ना को आतंकियों को पनाह देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।
हुस्ना का बड़ा भाई अतिउर्र रहमान उर्फ हाफिज निठारी में कमरा लेकर रहता था। इसीलिए पुलिस और खुफिया एजेंसियां निठारी की खाक छान रही हैं।
बिजनौर में रहने वाली हुस्ना की निठारी में हाफिज से बातचीत होती रहती थी। इस दौरान बिजनौर के उमरी गांव में उसके घर पर सिमी के पांच आतंकियों शेख महबूब (25), अमजद (25), मोहम्मद असलम (26), मोहम्मद अजाजुद्दीन (30) और जाकिर हुसैन (32) ने पनाह ली हुई थी।
बेहद खतरनाक हैं पांचों आतंकी
घर में विस्फोटक भी छिपाया हुआ था, जिसमें ब्लॉस्ट के बाद इनके छिपे होने का राज खुला। इसके बाद बिजनौर से पांचों आतंकी गायब हो गए थे। वहीं, उन दिनों निठारी में रहने वाला हाफिज भी कुछ समय के लिए गायब हो गया था। खुफिया एजेंसियों को शक था कि कहीं बिजनौर से भागे पांचों आतंकी नोएडा में तो नहीं रह रहे थे।
पांचों आतंकियों पर आरोप है कि तेलंगाना की एसबीआई ब्रांच में 1 फरवरी 2014 को उन्होंने 46 लाख रुपये की डकैती डाली थी। इसके बाद एक मई को बंगलूरू गुवाहाटी एक्सप्रेस में ब्लास्ट करने और पुणे के गणेश मंदिर के पास दस जुलाई को ब्लास्ट करने के बाद 12 सितंबर 2014 को बिजनौर में इनके घर में ही विस्फोटक में धमाका हो गया था। इन पर पिछले दिनों बंगलूरू ब्लॉस्ट में भी शामिल होने का शक जताया जा रहा है।
नोएडा से एक आतंकी को भले ही पुलिस और एटीएस ने दबोच लिया, मगर
खुफिया एजेंसी ने जिले में और भी आतंकियों के छुपे होने की आशंका जताई है।
पुलिस
ने अपने सूत्रों को सक्रिय कर दिया है। शहर और देहात में सघन जांच अभियान
शुरू करने तथा बंद मकानों और फ्लैटों की भी जांच के निर्देश दिए हैं। हाल
की आतंकी घटना और बंगलूरू में विस्फोट और भारतीय समुद्री सीमा में घुसपैठ
की कोशिश के बाद खतरे को देखते हुए कड़ी चौकसी बरती जा रही है।
महज 20 हजार में बना भारतीय
बांग्लादेशी अब्दुल अजीज ने हैदराबाद के बहादुरपुरा विधानसभा क्षेत्र से महज बीस हजार रुपये में अवैध तरीके से मतदाता पहचान पत्र और आधार कार्ड बनवा लिया था। इसके सहारे वह भारतीय बनकर देवबंद में रहने आ गया था। नोएडा से गिरफ्तारी के समय दोनों प्रदेशों की पुलिस, एटीएस टीम को उसके पास से पहचान पत्र मिले हैं।
पश्चिम बंगाल के नार्थ 24 परगना जिले की थाना बन गांव पुलिस ने सीमा क्षेत्र से 17 दिसंबर को बरकतउल्ला को गिरफ्तार किया था। इसके पास एक लैपटॉप भी मिला था। पूछताछ में इसने बताया है कि दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में एक जमात में मिले देवबंद के अब्दुल अजीज को लैपटॉप देना था।
झुग्गी में छिपा था: पश्चिम बंगाल पुलिस ने बरकतउल्ला की निशानदेही पर ही अब्दुल अजीज को नोएडा के सेक्टर-14 स्थित पेट्रोल पंप के पास से गिरफ्तार किया था। अब्दुल नोएडा में ही किसी झुग्गी क्षेत्र में ही छिपकर रह रहा था। इसके बाद बरकतउल्ला के बुलाने पर सेक्टर-14 पेट्रोल पंप के पास से उसकी गिरफ्तारी हुई।
पहले देवबंद आया था अजीज
पश्चिम बंगाल पुलिस के हत्थे चढ़े संदिग्ध बांग्लादेशी आतंकी अब्दुल अजीज को लेकर पुलिस के हाथ कई अहम सुराग लगे हैं। अब्दुल एजाज मूल रूप से बांग्लादेश का रहने वाला है और एनसीआर की एक बस्ती में रहता था। देवबंद में भी बड़ी संख्या में बांग्लादेशी रहते हैं। ऐसे में उनसे मिलने और देवबंद घूमने के लिए वह कई बार यहां आ चुका है। हालांकि पुलिस अब तक यह पता नहीं लगा पाई है कि वह किसके घर पर आता था।
दरअसल, देवबंद में बड़ी संख्या में बांग्लादेशी रहते हैं। ऐसे में एनसीआर में रहने वाले तमाम बांग्लादेशियों का यहां सीधा संपर्क रहता है। एसएसपी राजेश पांडेय के नेतृत्व में खंगाली जा रही संदिग्धों के डोजियर में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। नोएडा में पकड़ा गया संदिग्ध आतंकी कई बार देवबंद आ चुका है।
स्थानीय अभिसूचना इकाई और स्पेशल ब्रांच के अधिकारी देवबंद की छत्ता मस्जिद समेत उन मोहल्लों में लोगों से जानकारी जुटाने में लगे हैं जहां पर मदरसा छात्र किराये पर कमरा लेकर रहते हैं। संदिग्ध आतंकी अब्दुल अजीज की फोटो तक लोगों को दिखाई गई, लेकिन उसके बारे में खास जानकारी खुफिया एजेंसियों को नहीं मिल पाई।
कई बार लगाया सहारनपुर का चक्कर
खुफिया विभाग ने सिर्फ यही जानकारी जुटाई कि दो-तीन साल पहले अब्दुल अजीज देवबंद के किसी मदरसे में दाखिला लेने आया था, लेकिन उसे एडमिशन नहीं मिला था। खुफिया एजेंसियां यह भी जानकारी जुटाने में लगी है कि अब्दुल अजीज किस मकान में किराये पर रहता था और किस मदरसे में दाखिला लेना चाहता था।
वह किन लोगों के वह संपर्क में रहा है। क्योंकि अब्दुल अजीज के ठिकाने बदल कर रहने की बात सामने आई है। खुफिया एजेंसियों के अलावा पुलिस भी अपने स्तर से अब्दुल अजीज के संबंध में छानबीन कर रही है। ब्यूरो
देवबंद में संदिग्धों की तलाश
यह बात सामने आ चुकी है कि संदिग्ध अब्दुल अजीज कई बार देवबंद आया। इसके अलावा वह एनसीआर में बांग्लादेशी बस्ती में रहता था, लेकिन यहां वह किन लोगों के संपर्क में था, इस बात की जानकारी जुटाई जा रही है। बताया जाता है कि तीन चार महीने पहले ही वह अंतिम बार देवबंद आया था। इसके बाद वह फोन पर ही लोगों के संपर्क में रहा।