दिल्ली के यमुना तट से ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम के तहत यमुना कार्य योजना चरण-तीन परियोजना का केंद्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मंत्री उमा भारती ने शनिवार को उद्घाटन किया।
इस दौरान उन्होंने यमुना नदी में फैली गंदगी और देश में नदियों की दुर्दशा के लिए पूर्व की सरकारों को दोष दिया। यमुना नदी को साफ करने के पहल की शुरुआत करते हुए उमा ने कहा कि हम इस मामले में पिछली सरकारों की भांति बदनाम नहीं होंगे।
इस बार पूरी तैयारी के साथ यमुना नदी को साफ करने की दिशा में कदम उठाया गया है। वृंदावन और मथुरा तक यमुना नदी में गंदा पानी न पहुंचे, इसके लिए दिल्ली की जिम्मेदारी है।
यमुना नदी के पानी से बांके बिहारी को स्नान कराया जाता है और दुनिया भर के लोग वहां जाते हैं। यमुना तट से नदियों को निर्मल बनाने की योजना शुरू करने के मकसद का खुलासा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दूषित हो चुकी नदी के किनारे बैठकर देश की नदियों को साफ नहीं जा सकता।
इस कारण उन्होंने सबसे पहले यमुना नदी को साफ करने का बीड़ा उठाया है। क्योंकि केंद्र सरकार से लेकर नदियों और पर्यावरण से जुड़े सभी विभागों के कार्यालय दिल्ली में बने हुए हैं।
कार्यक्रम के दौरान उमा ने एलान किया कि नदियों को सिर्फ निर्मल ही नहीं बनाया जाएगा, बल्कि उनका सौंदर्यीकरण भी किया जाएगा। उनके किनारों को भी पर्यटन के उद्देश्य से विकसित किया जाएगा।
उमा ने कहा कि नदियों की पहचान बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि मानसून के दौरान सभी नदियों के आसपास अनेक स्थानों पर उनके पानी का भंडारण किया जाए।
पानी की कमी होने पर उसे नदी में छोड़ा जाएगा। क्योंकि नदियों को नदियों से जोड़ने से वे पानी के मामले में तो जीवत हो रही हैं, लेकिन इससे उनका स्वभाव और खासियत नहीं लौट सकती है। उनकी विशेषता तभी दिखाई देगी, जब नदियों में उनका ही पानी आए।
अंग्रेजी में जानकारी लिखी होने पर लगाई अधिकारियों को फटकार
उमा भारती ने कार्यक्रम के दौरान अपने विभाग के अधिकारियों को मंच पर ही फटकार लगाई। दरअसल, यमुना कार्ययोजना चरण-तीन के शुभारंभ कार्यक्रम में अधिकारियों ने परियोजना से जुड़ी जानकारी अंग्रेजी में लिख रखी थी।
उमा भारती ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि हर देश में अपनी भाषा को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन भारत में अंग्रेजी के पीछे लगे हुए हैं, जबकि अंग्रेजों को गए हुए 70 साल हो गए।
उमा भारती ने कहा कि वह कई बार अधिकारियों को समझा चुकी हैं कि हिंदी को महत्व दें और बोलचाल की भाषा का उपयोग करें। मगर अधिकारी अधिकांश बार अंग्रेजी का उपयोग करते हैं।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे पूरे देश में स्थानीय भाषा को महत्व दें। केंद्रीय मंत्री की फटकार का असर भी तत्काल दिखाई दिया। कार्यक्रम का संचालन कर रही महिला अधिकारी शुरुआत में अंग्रेजी में बोल रही थीं, मगर उनके संबोधन के बाद उन्होंने हिंदी में बोलना शुरू कर दिया।