दिल्ली विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी ने दक्षिण दिल्ली के सीटों पर अच्छा कमाल किया था। पॉस कॉलोनी ग्रेटर कैलाश हो या फिर मध्यम वर्ग का इलाका अंबेडकर नगर, ऐसी ही कई सीटों पर पार्टी जीती थी।
इस बार दक्षिण दिल्ली संसदीय चुनाव में आप ने कर्नल देवेंद्र सहरावत को अपना प्रत्याशी बनाया है। हालांकि विधानसभा चुनावों में वह हार गए थे लेकिन फिर भी इस बार पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है। अमर उजाला ने चुनाव से ठीक एक दिन पहले उनसे बातचीत की। उसी बातचीत के मुख्य अंश।
सवाल: विधान सभा चुनाव में आप हार गए थे। फिर भी पार्टी ने आपको टिकट दिया। इसका कुछ लोगों ने विरोध भी किया था। कैसी चुनौती मिल रही है?
जवाब: विरोध के नाम पर राजनीति की गई। देखिए, मैं इसी क्षेत्र में पला-बढ़ा हूं। मैं पहले दिन से पार्टी से जुड़ा हूं। दरी पर बैठकर सियासत की। एक-एक लोगों को जोड़ा। सभी कार्यकर्ताओं से जुड़ाव रहा है। आम लोग भी चुनाव में मदद करने के लिए आगे आ रहे हैं। मतदाता पार्टी के यकीन को गलत साबित नहीं होने देंगे।
सवाल: आम मतदाता आप पर यकीन क्यों करे?
जवाब: दिल्ली में आम आदमी पार्टी की 49 दिनों की सरकार रही। सबने इसका असर महसूस किया। रेहड़ी-पटरी वालों ने बेफिक्र होकर अपनी दुकान लगाई। बिजली-पानी पर खर्च कम हुआ। कारोबारियों को ढेरों मिलीं। इतना ही नहीं ईमानदार पुलिस वालों को भी काम करने का प्रोत्साहन मिला। लोगों ने हमारी सरकार की स्वादिष्ट खीर चखी है। इसकी मिठास लोगों को झाडू़ पर बटन दबाने को मजबूर करेगी।
सवाल: पहले सेना में थे। अब आपने अपनी भूमिका बदल ली। मतदाताओं के साथ कैसे संवाद बना रहे हैं?
जवाब: मेरे लिए दोनों भूमिकाओं में संघर्ष है। यह संघर्ष सीमा पर दुश्मनों को हराने का और सियासत से भ्रष्टाचार मिटाने का है। सीमा पर मजबूत इरादा जरूरी है और सियासी मैदान में भी। दोनों जगह हमने ईमानदारी से काम करलोगों का भरोसा जीता है। उनकी ही भाषा में उनकी बात कहता हूं। ऐसे में मतदाताओं को समझाने में दिक्कत नहीं होती।
सवाल: संसदीय क्षेत्र की क्या समस्याएं हैं?
जवाब: साफ-सुथरा पानी न मिलना सबसे बड़ी समस्या है। यहां बिजली की आंख-मिचौली आम है। पब्लिक ट्रांसपोर्ट न के बराबर है। बेरोजगारी चरम पर है। सत्ता का केंद्रीकरण आम लोगों को कमजोर कर रहा है। किसानों के साथ नाइंसाफी हुई है। साफ-सफाई की बुरी हालत है।
सवाल: चुनाव जीतने के बाद आप इनका समाधान कैसे करेंगे?
जवाब: सबसे पहला काम सभी लोगों तक साफ-सुथरा पानी पहुंचाने का होगा। गांवों को स्पेशल स्टेटस दिलाऊंगा। कोशिश रहेगी कि बसावट के हिसाब से गांव अपने पुराने स्वरूप को पा सकें यानी नाई, धोबी, बढ़ई, लुहार समेत अलग-अलग पेशे से जुड़ी करीब 36 बिरादरियां बेहिचक अपना पेशा कर सकें। सत्ता का विकेंद्रीकरण और ग्राम स्वराज हमारी प्राथमिकता में होगा। इसके अलावा दूसरी समस्याओं का योजनाबद्ध तरीके से निपटारा करूंगा।