विल अस्पताल में मरीजों और उनके तीमारदारों को पानी मयस्सर नहीं हो रहा है। अस्पताल के दूसरे और तीसरे फ्लोर पर में लगे सभी वाटर कूलर खराब हैं। इससे पानी नहीं निकल रहा है। करीब 40 डिग्री तापमान और गर्म हवाओं के थपेड़े के बीच अस्पताल के वार्ड में भर्ती मरीज और उनके तीमारदार प्यास बुझाने के लिए ठंडा पानी नहीं मिलने से परेशान हैं। वहीं, दिन की ओपीडी में आने वाले मरीजों को भी पानी नहीं मिलता है। मजबूरी में बाहर की दुकानों से पानी खरीदना पड़ रहा है।
दरअसल, पिछले साल गर्मी के बाद वाटर कूलरों की सर्विस नहीं करवाई गई। इसकी वजह से कोई भी कूलर काम नहीं कर रहा है, जबकि प्रत्येक कूलर के साथ आरओ सिस्टम लगा हुआ है। ग्राउंड फ्लोर पर ओपीडी और नीकू वार्ड में भर्ती नवजात के तीमारदार के लिए पीने के पानी की व्यवस्था केवल एक जगह है, जबकि ओपीडी में हर रोज करीब 1800 से 2000 मरीज आते हैं। इसके हिसाब से यह एक वाटर कूलर नाकाफी है। फिलहाल वाटर कूलर खराब होने की वजह से गर्म पानी आ रहा है।
इसके अलावा यहां पर स्त्री रोग विभाग है। जहां दर्जनों महिलाएं प्रसूति के बाद रुकती है। इसके लिए भी कोई अलग से इंतजाम नहीं हैं। प्रथम तल पर केवल एक वाटर कूलर है, जो खराब है, जबकि यहां ऑपरेशन थियेटर, प्राइवेट वार्ड और आईसीयू मौजूद हैं। इसके खराब होने की वजह से मरीजों को बाहर जाना पड़ता है। पानी की अनुपलब्धता के कारण उनके परिजनों को दौड़ लगानी पड़ रही है। दूसरे तल पर शिशु वार्ड और महिला वार्ड का भी यही हाल है। वहां के वाटर कूलर का दरवाजा रस्सी से बंद है।
अस्पताल परिसर में भी नहीं है पानी
अस्पताल के अंदर के अलावा अस्पताल परिसर में भी पानी का माकूल बंदोबस्त नहीं है। डिस्पेंसरी के बाहर लगा वाटर कूलर अधिक पानी देने में सक्षम नहीं है, जबकि यहां पर हर दिन सैकड़ों लोग आते हैं। एंबुलेंस सेवा में तैनात ड्राइवर, लैब टेक्नीशियन और अन्य कर्मचारी दिन रात सेवा देते हैं, लेकिन इनके लिए भी गर्मी के दिनों में अलग से इंतजाम नहीं किया गया है। छोटी टंकी होने की वजह से यहां जल्द ही ठंडा पानी खत्म हो जाता है।
डॉ. कांता गोयल, प्रधान चिकित्सा अधिकारी:
वाटर कूलर ठीक करने को कहा जा चुका है। सोमवार तक सभी दुरुस्त हो जाएंगे। सभी जगहों पर ठंडे पानी की व्यवस्था हो जाएगी। अगर और जरूरत होगी तो इसकी भी व्यवस्था कर दी जाएगी।