उमस भरी गर्मी और चढ़ते तापमान के साथ लोग डायरिया और टाइफाइड के शिकार होने लगे हैं। इसका असर सिविल अस्पताल से लेकर निजी अस्पतालों में भी दिख रहा है। उम्रदराज से लेकर बच्चे डायरिया के शिकार हो रहे हैं। बीते एक सप्ताह में केवल सोहना में 70 मामले सामने आए हैं।
सिविल अस्पताल में बच्चों के लिए बने चाइल्ड वार्ड के 11 बेड पर बच्चे भर्ती हैं, जबकि इमरजेंसी में हर दिन सात से दस मरीज आ रहे हैं। बता दें कि बृहस्पतिवार को एक बच्चे की मौत भी डायरिया से हो चुकी है।
गर्मी का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर दिख रहा है। सिविल अस्पताल के 1600 ओपीडी में हर दिन करीब 50 मरीज बुखार, उल्टी और दस्त के आ रहे हैं। अधिक गंभीर स्थिति में आने वाले बच्चों को अस्पताल में भर्ती किया जा रहा है। चाइल्ड वार्ड में 16 बेड हैं और इनमें 11 बच्चे दाखिल हैं। वहीं, निजी अस्पतालों में भी डायरिया, टाइफाइड और लू के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है।
निजी अस्पतालों में करीब 15 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। हर दिन करीब छह से आठ मरीज भर्ती हो रहे हैं। सेक्टर-10 के सिविल अस्पताल और ईएसआई में भी 50 से अधिक मामले आ चुके हैं। हालांकि सभी अस्पताल प्रशासन की मानें तो स्थिति नियंत्रण में है।
स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. वीके थापर का कहना है कि बीमारी से निपटने के लिए अस्पताल में एंटीबायोटिक दवाओं के साथ जीवन रक्षक घोल की व्यवस्था भी की गई है, वहीं मरीजों को बचाव व उपचार के बारे में जानकारी दी जा रही है।
सोहना खंड में आए हैं 70 मामले
बीते एक सप्ताह में जिले में सबसे अधिक मामले सोहना खंड से आए है। सोहना अस्पताल की ओपीडी में 40 मरीजों को देखा गया, जबकि इमरजेंसी में 31 मरीज आए। सात को भर्ती किया गया है। स्वास्थ्य विभाग की सूचना मिलने के बाद विभाग ने एक टीम बनाकर गांव का दौरा कराया और सभी घरों में लोगों के डायरिया के बारे में बातचीत की गई है। बिल्चिंग पाउडर और ओआरएस का घोल दिया गया। एहतियातन बरतते हुए स्वास्थ्य विभाग आंगनबाड़ी और आशा वर्करों को भी लोगों को जागरूक करने के आदेश दिए गए हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने बनाई रैपिड एक्शन टीम
जिले में डायरिया से लोगों को नुकसान न हो और तुरंत मामले पर कार्रवाई की जाए। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से चार सदस्यीय रैपिड एक्शन टीम डिप्टी सिविल सर्जन डॉ. वीके थापर की अगुवाई में बनाई गई है। टीम जिले के विभिन्न प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की रिपोर्ट के आधार पर जगह-जगह जाकर जांच करेगी।
कैसे करें लू से बचाव
- अधिक से अधिक पानी और तरल पदार्थ जैसे लस्सी, नारियल पानी और हल्के फ्रूट ड्रिंक अधिक मात्रा में लें।
- निर्जलीकरण होने पर ग्लूकोज, नमक एवं चीनी का घोल और ओआरएस मरीज को पीने को दें।
- तेज धूप में जाने से बचें। अगर जाना जरूरी हो तो अपने साथ छाता अवश्य रखें।
- सिर को ढककर रखें और आंखों को धूप से बचाने के लिए चश्मे का प्रयोग करें।
- घर से बाहर निकलते समय पानी की बोतल अवश्य साथ लें।
डायरिया के लक्षण एवं बचाव
-दस्त व उल्टी होना
-पेट में हल्का दर्द रहना
-पानी उबाल कर पीएं
-लगातार दस्त व उल्टी होने से शरीर में पानी की कमी हो जाती है।
-निर्जलीकरण से बचने के लिए मरीज को जीवन रक्षक घोल पिलाएं।
-खुले व कटे फल न खाएं
-भोजन से पूर्व व शौच के बाद हाथ साबुन से अवश्य धोएं।
-सफाई का पूरा ध्यान रखें।
-हल्का व सुपाच्य आहार लें। इसके अलावा तरल पदार्थ जैसे नारियल पानी व दाल का पानी भी लेते रहें।
डॉ. रमेश धनखड़, सिविल सर्जन: डायरिया के मामले सामने आने लगे हैं। मुख्यालय को भी इस बाबत सूचित कर दिया गया है। सोहना में भी एक टीम को भेजा गया था, वहां अलग-अलग गांवों के छिटपुट मामले हैं। स्थिति नियंत्रण में है। जगह-जगह बचाव के प्रचार का इंतजाम करने को कहा गया है।