दो दिन पहले केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आपराधिक कानून (संशोधन) अध्यादेश 2018 को मंजूरी दे दी थी, जिसमें 12 साल से कम उम्र की लड़कियों के बलात्कार के लिए कम से कम 20 वर्षों से लेकर जीवनकाल या मृत्यु तक कड़े दंड का प्रावधान किया गया है।
खंडपीठ ने कहा कि सरकार रेप के मूल कारणों को नहीं देख रही है या लोगों को शिक्षित नहीं कर रही। अदालत ने सवाल किया कि क्या अध्यादेश लाने से पूर्व किसी पीड़ित से पूछा गया कि वह क्या चाहता है।
दरअसल याचिका पर सुनवाई के दौरान 16 अप्रैल 2012 को वसंत विहार में 23 वर्षीय युवती से गैंगरेप के बाद बलात्कार कानून में किए गए संशोधन और अब नए अध्यादेश के बारे में खंडपीठ को सूचित किया गया।
याची ने कहा कि यौन अपराध में कानून में संशोधन कर कानून का दुरुपयोग किया जा रहा है। याची ने कहा कि इस प्रकार के कड़े कानून से निर्दोष को फर्जी मामलों में फंसाने की संभावना बनी रहती है। अगली सुनवाई 10 सितंबर को होगी।