बचाव पक्ष ने दलील दी कि वह पांच करोड़ की रकम में से 1.98 करोड़ रुपये लौटा चुके हैं और अब उन्हें मूल रूप से करीब 3 करोड़ रुपये ही लौटाने हैं, लेकिन अभियोजन पक्ष ने मुआवजा राशि को पांच करोड़ से बढ़ाकर कई गुना कर दिया है, जो उचित नहीं है।
इस पर कोर्ट ने कहा कि रकम लौटाने के लिए बचाव पक्ष दो बार हाईकोर्ट में भी हलफनामा (अंडरटेकिंग) दायर कर चुका है। इसके बावजूद रकम नहीं लौटाई गई। लिहाजा यह साफ होता है कि बचाव पक्ष ने रकम लौटाने में कोताही बरती है।
अभियोजन पक्ष ने कहा कि राजपाल यादव, उनकी पत्नी और उनकी कंपनी श्रीनौरंग गोदावरी ने कानून का उल्लंघन किया है, लिहाजा उन्हें सजा दी जाए और ऋण के रूप में ली गई राशि को चेक बाउंस अधिनियम की शर्तों के तहत करीब दो गुना करके वापस दिलाया जाए।
निजी मुचलके पर मिली जमानत
कोर्ट का फैसला सुनाए जाने के करीब आधे घंटे बाद ही राजपाल यादव को प्रति चेक बाउंस मामले में 50 हजार के निजी मुचलके पर जमानत मिल गई। बचाव पक्ष ने सभी सात मामलों के लिए 3.5 लाख रुपये के पर्सनल बॉण्ड भरे। जमानत मिलने के बाद राजपाल यादव ने राहत की सांस ली।
कड़कड़डूमा अदालत में फैसला सुनाने के बाद राजपाल यादव कोर्ट रूम से बाहर अपने प्रशंसकों से घिर गए। इस दौरान उन्होंने कहा, ‘मैं निर्दोष हूं क्योंकि मैंने जो रुपये लिए थे, उन्हें लौटा रहा था। कहीं लेकर भागा नहीं था। इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करूंगा।’
कोर्ट रूम से बाहर निकलते ही उनके प्रशंसकों की भीड़ उनसे मिलने पहुंची। इस दौरान लोगों ने उनके साथ सेल्फी ली। कोर्ट रूम के अंदर भी जज साहब की गैर हाजिरी में लोगों ने राजपाल यादव के साथ सेल्फी ली।
बता दें कि हाईकोर्ट में कई वर्ष पूर्व मामले की सुनवाई के दौरान अचानक अदालत से गायब होने पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया था। अदालत ने वारंट जारी कर राजपाल और उनकी पत्नी को जेल भेज दिया था।
दरअसल राजपाल की पत्नी मुंबई में थी जबकि राजपाल ने कहा कि वह अदालत में बाहर बैठी है। अदालत ने उन्हें अंदर लाने को कहा तो स्वयं को फंसता देख राजपाल यादव भी भाग खडे़ हुए थे।
बता दें कि कोर्ट ने 13 अप्रैल को राजपाल यादव, उनकी पत्नी राधा यादव और कंपनी श्रीनौरंग गोदावरी को दिल्ली के लक्ष्मी नगर की कंपनी मुरली प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड से 2010 में लिए लिए गए पांच करोड़ के ऋण को न लौटाने का दोषी ठहराया था।
कंपनी ने राजपाल पर रकम लौटाने के एवज में दिए गए सात चेक बाउंस होने पर अलग-अलग सात मामले दर्ज करवाए थे। इन चेक में डेढ़ करोड़ की रकम प्रति चेक भरी गई थी, जो सात बार बाउंस हो गए थे।
राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के प्रोडक्शन और रिलीज के लिए यह कर्ज लिया था, लेकिन किन्हीं कारणों के चलते फिल्म निर्धारित समय पर रिलीज नहीं हुई थी और राजपाल निर्धारित समय पर ऋण की रकम नहीं लौटा पाए थे।