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दिल्ली का रण : अपनी ताकत दिखाने आज निकलेंगे वोटर, सुबह 8 से शाम 6 बजे तक मतदान

Sat, 08 Feb 2020 12:10 AM IST
अवधेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
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भारत में मतदान - फोटो : पीटीआई
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दिल्ली के मतदाता आज अपने वोट की ताकत दिखाने के लिए सड़कों पर निकलेंगे। मतदाता ईवीएम का बटन दबाकर 5 साल के लिए नई सरकार चुनेंगे। इस दौरान मतदाताओं की नजर आम आदमी पार्टी (आप), भाजपा व कांग्रेस की ताकत और कमजोरी पर रहेगी। मतदान सुबह 8 से शाम 6 बजे तक 13750 केंद्रों पर होगा।

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मतदाता के मन पर छाने के लिए तीनों दलों ने बीते एक माह में चुनाव प्रचार के दौरान कई तरह के सियासी दांव चले। अपनी सियासी चालों से आप हैट्रिक लगाना चाह रही है, जबकि 21 साल से दिल्ली की सत्ता से बाहर रही भाजपा दिल्ली फतह करने की तैयारी में है। कांग्रेस भी सात साल बाद दोबारा सत्ता हासिल करने की होड़ में है।

कुल मतदाता: 1,47,86,382
पुरुष : 81,05,236
महिला: 66,80,277
थर्ड जेंडर: 869
अभी तक सबसे ज्यादा 2015 में 67 फीसदी मतदान

आम आदमी पार्टी (ताकत) 
  • बीते पांच साल से फ्री पानी व सस्ती बिजली का तोहफा, महिलाओं को बस में मुफ्त सफर।
  • शिक्षा का मॉडल देने का दावा।
  • मोहल्ला क्लीनिक समेत स्वास्थ्य का तीन स्तरीय मजबूत ढांचा।
  • सीसीटीवी कैमरा और फ्री वाई-फाई सुविधा की शुरुआत।
  • मुख्यमंत्री केजरीवाल का चेहरा।

कमजोरी
  • लास्ट माइल कनेक्टिविटी समेत बसों की हालत खराब।
  • खराब सड़कें।
  • साफ व 24 घंटे पानी की आपूर्ति न कर पाना।
  • एक व्यक्ति पर टिकी पार्टी, संगठन कमजोर।
  • यमुना की सफाई व वायु प्रदूषण।

भाजपा की ताकत और कमजोरी

ताकत
  • अनधिकृत कॉलोनियों को पक्का करना। झुग्गी-बस्ती का पुनर्वास।
  • प्रदूषण में कमी लाने के लाने के लिए हाईवे का निर्माण।
  • मजबूत संगठन, बूथ स्तर पर पकड़।
  • राष्ट्रवाद का एजेंडा, आक्रामक चुनाव प्रचार।
  • सीलिंग से राहत दिलाने के लिए कानून।

कमजोरी
  • सीएए/एनआरसी के खिलाफ चल रहा विरोध प्रदर्शन।
  • केंद्र सरकार के अधीन दिल्ली पुलिस, क्राइम ग्राफ का ऊंचा होना।
  • एमसीडी के खिलाफ सत्ता विरोध।
  • मुख्यमंत्री पद का चेहरा न होना और प्रदेश नेताओं में मतभेद।
  • 21 साल सत्ता से दूरी, पिछले चुनाव में सिर्फ तीन सीट।
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कांग्रेस की ताकत और कमजोरी

मजबूती
  • दिल्ली में शीला दीक्षित सरकार के किए गए 15 साल के काम।
  • सीएए/एनआरसी के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन का समर्थन।

कमजोरी
  • प्रदेश स्तरीय नेताओं में तालमेल की कमी।
  • प्रचार अभियान का कमजोर होना।
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