बार कौसिंल ऑफ इंडिया के एक आदेश से गाजियाबाद में 30 जनवरी को होने जा रहे बार चुनाव न केवल आगे बढ़ सकते हैं, बल्कि करीब 800 अधिवक्ताओं की प्रैक्टिस पर भी इसका असर पड़ सकता है।
बार कौसिंल ऑफ इंडिया के आदेश के मुताबिक 2010 के बाद कानून परीक्षा पास करने वाले जिन अधिवक्ताओं ने ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (एआईबीई) परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है, वह न तो किसी केस में अपना वकालतनामा लगा सकते हैं और न ही बार एसोसिएशन चुनाव में मतदान कर पाएंगे।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल पंडित के अनुसार शुक्रवार को ही बार कौंसिल ऑफ यूपी का एक पत्र उन्हें मिला। इसके साथ ही बार कौंसिल ऑफ इंडिया का आदेश पत्र भी लगा था।
इसमें लिखा है कि 2010 से बाद बने ऐसे अधिवक्ता जिन्होंने बार कौंसिल ऑफ यूपी की परीक्षा पास करने के बाद बार कौंसिल ऑफ इंडिया की परीक्षा उत्तीर्ण नहीं की है, उन्हें वकालतनामा लगाने का अधिकार नहीं है। ऐसे अधिवक्ताओं को बार चुनाव में मतदान का भी अधिकार नहीं दिया जाएगा।
बार एसोसिएशन के सचिव योगेंद्र कौशिक के अनुसार गाजियाबाद कोर्ट में प्रैक्टिस करने वाले एक करीब 800 अधिवक्ता नए आदेश से प्रभावित होंगे। उनके यहां 30 जनवरी को चुनाव घोषित हैं, ऐसे में नए आदेश से परेशानी खड़ी हो गई है।
अब दोबारा से मतदाता सूची तैयार की जाएगी। उन्होंने अपील की है कि जिन अधिवक्ताओं ने इस परीक्षा को पास कर लिया है वह 15 जनवरी तक अपने सर्टिफिकेट बार एसोसिएशन आफिस में जमा करा दें, जिससे मताधिकार के अधिकारी बन सकें।