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Haryana Elections Result: इनेलो, जजपा जैसी पार्टी के प्रत्याशी नोटा के सामने धराशायी, नोटा से भी कम मिले वोट

Thu, 10 Oct 2024 10:29 AM IST
आकाश दुबे रोजी सिन्हा, अमर उजाला, गुरुग्राम

सार

गुड़गांव विधानसभा में इनेलो और जजपा दोनों पार्टी के प्रत्याशियों ने नोटा से कम वोट प्राप्त किए। यहां इनेलो प्रत्याशी ने 396 वोट प्राप्त किए और जजपा प्रत्याशी ने 220 वोट प्राप्त किए।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI (File)
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विस्तार
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मिलेनियम सिटी की चारों विधानसभाओं में मतदाताओं ने इस बार भी नोटा को कई प्रत्याशियों से ज्यादा तवज्जो दी। मंगलवार को जारी हुए विधानसभा परिणामों के अनुसार नोटा को अच्छी-खासी संख्या में मतदाताओं ने अपना वोट दिया। हैरान करने वाली बात यह रही कि इनेलो, जजपा जैसी पार्टी के प्रत्याशी भी नोटा से कम वोट लाने में असमर्थ रहे। बादशाहपुर विधानसभा से जजपा प्रत्याशी 441 वोटों के साथ नोटा से भी कम वोट में सिमट गए। गुड़गांव विधानसभा में इनेलो और जजपा दोनों पार्टी के प्रत्याशियों ने नोटा से कम वोट प्राप्त किए। यहां इनेलो प्रत्याशी ने 396 वोट प्राप्त किए और जजपा प्रत्याशी ने 220 वोट प्राप्त किए। अन्य दो विधानसभा पटौदी और सोहना में दोनों पार्टियों की स्थिति बेहतर रही।

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नोटा को मिले इतने वोट
बादशाहपुर विधानसभा सीट से नोटा को 1803 वोट प्राप्त हुए। इसके अलावा गुडगांव सीट से नोटा को 1075, पटौदी से 668, सोहना से 599 वोट प्राप्त हुए। बादशाहपुर विधानसभा से 13 प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे। इन 13 प्रत्याशियों में से 5 प्रत्याशी ही नोटा से ज्यादा वोट प्राप्त कर सके। अन्य सभी 8 प्रत्याशियों के मुकाबले मतदाताओं ने नोटा में विश्वास जताया। इसी प्रकार गुड़गांव विधानसभा में 16 प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे। ऐसे में ईवीएम में 17वें प्रत्याशी के रूप में नोटा का था। इन 17 प्रत्याशियों में से 13 प्रत्याशियों ने नोटा से कम प्राप्त किए। पटौदी विधानसभा से 7 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा। 7 प्रत्याशियों में से 5 प्रत्याशियों ने नोटा से ज्यादा वोट लिए। सोहना विधानसभा में कुल 10 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा था। इन 10 प्रत्याशियों में से 3 प्रत्याशियों को नोटा से कम वोट मिले हैं।

2019 की यह थी स्थिति
वर्ष 2019 में हुए विधानसभा चुनाव में चारों विधानसभा सीटों पर नोटा ने 500 से ज्यादा वोट प्राप्त किए। उस दौरान भी नोटा का वोट प्रतिशत कई निर्दलीय उम्मीदवारों से ज्यादा रहा। बादशाहपुर विधानसभा से चुनाव के दौरान 16 प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतरे थे, जिसमें से 11 प्रत्याशियों को मिली वोट का आंकड़ा नोटा के सामने बौना साबित हुआ। इनमें जिन चार प्रत्याशियों को नोटा से ज्यादा वोट मिले थे। उनमें से तीन प्रत्याशी भाजपा, जजपा और कांग्रेस से थे। जबकि चौथा प्रत्याशी निर्दलीय था। अन्य सभी 11 प्रत्याशियों में एक प्रत्याशी बीसीपी से और अन्य 10 निर्दलीय प्रत्याशियों ने नोटा से भी कम वोट लिए।

गुडगांव विधानसभा में भी चुनाव के दौरान 17 प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे जिसमें से 9 प्रत्याशियों ने नोटा से ज्यादा वोट प्राप्त किए। इन नौ प्रत्याशियों में 6 प्रत्याशी राजनीतिक दलों से और 3 निर्दलीय थे। अन्य 8 प्रत्याशियों ने नोटा से भी कम वोट प्राप्त किए। सोहना विधानसभा में भी यही स्थिति रही। यहां 13 प्रत्याशी चुनावी मैदान में रहे जिसमें से 5 निर्दलीय प्रत्याशियों ने नोटा से भी कम वोट प्राप्त किए। पटौदी विधानसभा में स्थिति बेहतर रही। यहां 222465 मतदाताओं में से 136745 मतदाताओं ने मतदान किया। 136745 मतदाताओं में से 732 मतदाताओं ने नोटा को वोट किया। इसके अलावा यहां 12 प्रत्याशियों में से 10 प्रत्याशियों ने नोटा से ज्यादा वोट प्राप्त किया। मात्र एक निर्दलीय प्रत्याशी ने नोटा से कम वोट लिए।

वर्ष 2024 लोकसभा चुनाव में भी नोटा का वोट प्रतिशत अच्छा
वर्ष 2024 में जून माह में हुए लोकसभा चुनाव में भी नोटा का वोट प्रतिशत अच्छा रहा। आंकडों के मुताबिक गुड़गांव लोकसभा सीट से 1601232 मतदाताओं ने मतदान किया था। इस लोकसभा सीट से 23 उम्मीदवार चुनावी मैदान में थे। इन 23 उम्मीदवारों में से 4 उम्मीदवार ही नोटा से ज्यादा वोट प्राप्त कर सके। इन चार उम्मीदवारों में 808336 वोटों के साथ पहले नंबर पर राव इंद्रजीत सिंह, 733257 वोटों के साथ राज बब्बर दूसरे स्थान पर, 13278 वोटों के साथ राहुल फाजिलपुरिया तीसरे स्थान पर और 8946 वोटों के साथ विजय खटाना चौथे स्थान पर रहे। अन्य 18 निर्दलीय उम्मीदवार नोटा के सामने धराशायी हो गए।
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क्या है नोटा 
नोटा का अर्थ नॉन ऑफ द एबव है। 2013 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद देश में नोटा (उपरोक्त में से कोई नहीं) का इस्तेमाल शुरू हुआ था। अगर चुनाव लड़ रहे सभी प्रत्याशी मतदाता के लिहाज से उपयुक्त नहीं हैं तो वह नोटा को अपना वोट दे सकता है। नोटा भौतिक प्रत्याशी नहीं है। ऐसे में नोटा की मौजूदगी किसी को भी वोट न देने के अधिकार के तहत एक आभासी विकल्प के रूप में है।
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