प्रदेश भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निवास को सील करने की कार्रवाई का स्वागत किया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने बुधवार को कहा कि लोकनिर्माण विभाग को इस विवादित ‘शीश महल’ को पहले ही सील कर देना चाहिए था, क्योंकि सीलिंग जन आकांक्षाओं के अनुरूप है और विभाग को इस भवन का वीडियो ग्राफिक सर्वेक्षण करवाकर रिपोर्ट दिल्ली की जनता के समक्ष रखनी चाहिए।
भाजपा लगातार जांच व सीलिंग की मांग कर रही है। अब इसकी हर बात को जनता के बीच रखा जाना चाहिए। फ्लैग स्टाफ रोड स्थित बंगले पर मुख्यमंत्री आतिशी का बिना सरकारी आवंटन नियमों के पालन के कब्जा करवाने की जल्दबाजी साफ दर्शाती है कि बंगले में कुछ न कुछ ऐसा है जिसे केजरीवाल न सिर्फ दिल्ली वालों से बल्कि कानून एवं लोकनिर्माण विभाग तक से छुपाकर रखना चाहते हैं।
मीडिया प्रमुख प्रवीण शंकर कपूर ने कहा है कि विडंबना है कि जिस पार्टी की सारी राजनीति ही न बंगला, न गाड़ी पर आधारित थी, वह आज बंगले के लिए अखाड़ा जमाए बैठी है। आतिशी के पास मंत्री के रूप में पहले से आवंटित 17एबी मथुरा रोड का बंगला है और इसी बंगले से तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने 1998 से 2004 तक सरकार चलाई थी।
इस मामले में उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री आतिशी का बिना आवंटन बंगले में प्रवेश करना और आप नेताओं के बयान शराब घोटाले, अवैध निर्माण, पेड़ कटाई, स्वाति मालीवाल से मारपीट जैसे संवेदनशील मामलों के सबूत छिपे होने की पुष्टि करते हैं। सतर्कता विभाग के संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगने के लिए नोटिस जारी करना इस बात की ओर स्पष्ट इशारा करता है। अगर सरकारी भवन आतिशी को ही आवंटित किया जाना था, तो फिर आप नेता और मंत्री सरकारी प्रक्रिया का इंतजार क्यों नहीं कर सकते थे।
सात अक्तूबर को बिना किसी आवंटन के आतिशी ने बंगले में जबरन प्रवेश कर अपना सामान क्यों रखा। सांविधानिक पद पर आसीन व्यक्ति के लिए यह कृत्य उचित नहीं है। सरकारी भवन के आवंटन में समय लगता है और कुछ प्रशासनिक कार्यवाहियों की आवश्यकता होती है।
आप ने मुख्यमंत्री आतिशी को सीएम आवास आवंटित न होने पर भाजपा को घेरा है। आप के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने बुधवार को पार्टी मुख्यालय में प्रेसवार्ता में आरोप लगाते हुए कहा कि 27 सालों से भाजपा दिल्ली में वनवास काट रही है।
जब वह चुनाव में आप को हरा नहीं पाई तो सीएम आवास पर कब्जा करना चाह रही है। केजरीवाल ने सीएम आवास खाली कर दिया है। इसका प्रमाणपत्र भी है। अब उस आवास में मुख्यमंत्री आतिशी को शिफ्ट होना था और उन्होंने इसके लिए पत्र भी लिखा है। इसके बावजूद आवास आवंटित नहीं किया गया। आतिशी ने जब सीएम आवास को कैंप कार्यालय बनाकर मीटिंग शुरू की तो वहां से स्टाफ को भी हटा दिया गया है।
भाजपा ने दिल्ली में सत्ता हासिल करने के लिए कई योजनाएं अपनाईं और आप को तोड़ने का प्रयास किया। जब भाजपा दिल्ली में चुनाव नहीं जीत पाई, तो केजरीवाल को खत्म करने का प्रयास किया। केजरीवाल ने सीएम आवास खाली कर दिया। इसे लेकर भी दुष्प्रचार फैलाया गया। मुख्यमंत्री के तौर पर अब आतिशी को आवास में जाना था, लेकिन आवास अलॉट नहीं किया जा रहा है। भाजपा दिल्ली में चुनाव नहीं जीत पाती है और मुख्यमंत्री नहीं बना पाती है, तो अब मुख्यमंत्री के आवास पर कब्जा करना चाहती है।
भाजपा महिला विरोधी : प्रियंका
आप की प्रवक्ता प्रियंका कक्कड़ ने आरोप लगाया कि भाजपा की महिला विरोधी मानसिकता एक बार फिर दिल्ली और देश की जनता के सामने आ गई है। भाजपा ने नवरात्र के दौरान एक महिला मुख्यमंत्री का सामान सरकारी आवास से बाहर करा दिया। इससे पहले कभी भी ऐसा नहीं हुआ है। हमें सड़क पर बैठकर भी दिल्ली की जनता के काम करवाने होंगे तो हम करवाएंगे और ये लोग हमें रोक नहीं पाएंगे।
भारद्वाज ने उठाए सवाल तो कसा तंज
मंत्री सौरभ भारद्वाज ने उपराज्यपाल से सवाल किया कि जब वह राजनिवास में शिफ्ट हुए थे तो पुराने एलजी ने चाबी पीडब्ल्यूडी को सौंपी थी और क्या नए एलजी के शिफ्ट होने से पहले राजनिवास के सामानों की फेहरिस्त बनाई गई थी। इस पर राजनिवास ने तंज कसा है कि भारद्वाज इस बात से अनजान हैं कि राष्ट्रपति भवन, राजभवन और राज निवास का स्वामित्व क्रमश: राष्ट्रपति, राज्यपाल और उपराज्यपाल के पास हैं। सीपीडब्ल्यूडी, पीडब्ल्यूडी या किसी दूसरी एजेंसी का अधिकार नहीं है। इन एजेंसियों के पास पीएम, सीएम, मंत्रियों, न्यायाधीशों या अन्य सरकारी आवास होते हैं। जून 2022 से अब तक 65,000 लोग राज निवास का दौरा कर चुके हैं।
आधिकारिक निवास का स्वामित्व जनता के पास
सीएमओ सूत्रों का कहना है कि एलजी को यह एहसास होना चाहिए कि देश में किसी भी आधिकारिक निवास का स्वामित्व देश के लोगों का है। लोग इन आवासों में रहने और उनके हित के लिए काम करने के लिए एक प्रतिनिधि चुनते हैं। हालांकि, कुछ मामलों में यह देखा गया है कि एक गैर-निर्वाचित प्रतिनिधि इन आवासों में रहता है और लोगों की इच्छाओं के विरुद्ध काम करता है। एलजी आवास का दौरा करने वाले 65,000 लोगों को यह जानकर शर्म आएगी कि उनकी चुनी हुई सीएम को उनके आवास से बाहर निकाल दिया गया है।