बीते दिल्ली चुनाव में राजधानी के मतदाताओं के नई नए ट्रेंड स्थापित किए है। वोटर्स ने जहा पारंपरिक दलों के मिथ को तोड़ा है वहीं वोटकटुआ उम्मीदवारों को भी सबक सिखाया है।
उसी का परिणाम रहा कि बीते चुनाव मैदान में उतरे 880 उम्मीदवारों में से 682 अपनी जमानत तक नहीं बचा पाए। जिसमें स्वतंत्र, छोटे दलों के साथ बड़ी संख्या में राष्ट्रीय राजनैतिक दलों के उम्मीदवार भी शामिल है।
चुनाव को लेकर दिल्ली मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने हाल ही में चुनाव की विस्तृत रिपोर्ट जारी की है।
682 उम्मीदवारों की जमानत हो गई थी जब्त
रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में 6 राष्ट्रीय दल, 11 दूसरे राज्य की क्षेत्रीय दल, दो गैर मान्यता प्राप्त पार्टी जिसमें आम आदमी पार्टी भी शामिल है, 222 स्वतंत्र उम्मीदवार और 58 स्थानीय पार्टियों ने हिस्सा लिया।
इन सबके मिलाकर कुल 880 उम्मीदवार मैदान में उतरे। लेकिन इसमें से महज 198 ही अपनी जमानत बचाने में कामयाब रहे, जिसमें 70 जीते भी शामिल है। दिल्ली के मतदाताओं ने मैदान में उतरे 222 उम्मीदवारों में 220 की जमानत जब्त कर ली, महज दो उम्मीदवारों को सफलता मिली।
दूसरे सूबे में तूती बोलने राजनीतिक दलों की बोली भी दिल्ली आकर बंद हो गई। यूपी में सपा की सरकार है लेकिन यहां उसके मैदान में खड़े 25 के 25 उम्मीदवार जमानत नहीं बचा पाए। इसी तरह जेडीयू के 27 में से 26, लोक जनशक्ति पार्टी के 16 में से 16, आरएलडी के खड़े 7 के 7 उम्मीदवार अपनी जमानत बचाने में नाकाम रहे।
AAP के भी 9 उम्मीदवारों नहीं बचा पाए थे जमानत
दिल्ली में वोटर्स ने बदलाव की ऐसी हवा चलाई की राष्ट्रीय दलों को भी बड़ा झटका दिया। बीजेपी के 2, कांग्रेस 11, बसपा के 63, सीपीआई के 10, सीपीएम 3 और एनसीपी के 9 उम्मीदवार अपनी जमानत नहीं बचा पाए।
हवा जरूर आम आदमी पार्टी की चली लेकिन सही उम्मीदवार नहीं उतारने पर वोटर्स ने उनके भी 9 उम्मीदवारों की जमानत जब्त करा दी।
इसलिए जब्त होती है जमानत
चुनाव के दौरान विधानसभा में पड़े कुल हुए मतदान में से वोट के छठवां हिस्सा वहां खड़े प्रत्याशी को मिलना अनिवार्य है। अगर कुल वोटों में से किसी प्रत्याशी को उसके छठां हिस्सा नहीं मिलता है तो उसकी जमानत जब्त हो जाती है।
ऐसे समझे की अगर किसी विधानसभा में कुल 100 वोट पड़ा है तो कम से कम प्रत्येक प्रत्याश्ाी को 17 वोट मिलना अनिवार्य है। अगर किसी का वोट इससे कम है तो उसकी जमानत जब्त हो जाएगी।